मैड्रिड, रायटर। मैड्रिड में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रदूषण फैलाने वाले बड़े देशों को छोटे राष्ट्रों के दबाव का सामना करना पड़ा। विनाशकारी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक एक्शन प्लान की रूपरेखा तैयार करने के लिए कॉप-25 नामक यह शिखर सम्मेलन दो दिसंबर को शुरू हुआ था, लेकिन करीब दो सप्ताह के विचार-विमर्श के बाद बाद भी 2015 के पेरिस समझौते को कैसे लागू किया जाए, इस पर सभी देश एकमत नहीं हो सके हैं। वैश्विक एक्शन प्लान को लेकर बात नहीं बनी।

मूर्त रूप नहीं ले सका समझौता

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए चिली ने समझौते को लेकर एक आस भी बधाई थी, लेकिन यह मूर्तरूप नहीं ले सकी। चिली के अधिकारी आंद्रा उ लैंडरेट ने कहा, 'आज वह दिन है, जब हमें दुनिया को दिखाना होगा कि विनाशकारी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हम सभी सदस्य देश एक समझौते पर पहुंच सकते हैं।' हालांकि पर्यवेक्षकों के मुताबिक सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रतिनिधि इस सवाल पर विचार-विमर्श करते रहे कि क्या बड़ी मात्रा में खतरनाक ग्रीन हाउस गैस छोड़ने वाले देश अगले साल (जब पेरिस समझौता निर्णायक दौर में होगा) उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य को बढ़ाने का संकेत देंगे या नहीं।

पेरिस समझौता अधर में

लंदन स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरमेंट के निदेशक एंड्रयू नार्टन ने कहा कि पेरिस समझौता अधर में है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश चीन, भारत और ब्राजील कार्बन उत्सर्जन को लेकर नए लक्ष्य तय करने के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं। उधर, ब्रसेल्स में गुरुवार को पोलैंड को छोड़कर यूरोपीय संघ में शामिल देशों ने 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन पर सहमत हुए हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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