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ब्राजील में सत्ता परिवर्तन का वैश्विक असर: लूला बनाम बोल्सोनारो जंग का ब्रिक्स और भारत पर क्या होगा प्रभाव?

Published: Fri, 16 Oct 2026 12:18 AM (IST)

ब्राजील में 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा चरण होने जा रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा ...और पढ़ें

ब्राजील में 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा चरण होने जा रहा है

ब्राजील में 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा चरण होने जा रहा है

HighLights

  1. भारत और ब्राजील के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक रहा

  2. चीन 2009 से ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्राजील में 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा चरण होने जा रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो (जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे) के बीच मुकाबला है।

पहले चरण में फ्लावियो को 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। किसी को भी 50 प्रतिशत से अधिक वोट न मिलने के कारण दूसरा चरण तय हुआ। यह चुनाव सिर्फ ब्राजील का नहीं, बल्कि ब्रिक्स समूह और भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ब्रिक्स पर पड़ेगा असर

ब्रिक्स अब 11 सदस्यों वाला समूह है। ब्राजील ने समूह के विस्तार (खासकर ईरान को शामिल करने) का विरोध किया था। वह भारत की तरह ब्रिक्स को सुधारवादी रखना चाहता है, न कि पश्चिम के खिलाफ टकराव वाला मंच। हाल ही में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लूला प्रचार में व्यस्त होने के कारण अनुपस्थित रहे थे।

फ्लावियो बोल्सोनारो की जीत की सूरत में ब्राजील अमेरिका के करीब जा सकता है। उनके एजेंडे में ब्रिक्स का जिक्र नहीं है और उन्होंने समूह छोड़ने की संभावना भी जताई है। वे डॉलर से दूर जाने वाली पहलों के आलोचक हैं।

वहीं लूला मल्टी-अलाइनमेंट नीति अपनाते हैं। वे अमेरिका से संबंध बनाए रखते हुए चीन के साथ व्यापार बढ़ाते हैं और ब्रिक्स, जी-20 व संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों का इस्तेमाल करते हैं।

चीन 2009 से ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और उसके कुल निर्यात का करीब 30 प्रतिशत खरीदता है। अमेरिका ट्रंप प्रशासन के तहत ब्राजील पर दबाव बढ़ा रहा है।

भारत के लिए क्यों मायने रखता है

भारत और ब्राजील के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक रहा। दोनों देश 2030 तक इसे 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। ब्राजील लौह अयस्क और महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो भारत के इस्पात उद्योग के लिए फायदेमंद है। दोनों देशों के बीच 2006 से रणनीतिक साझेदारी है।

भारत ब्रिक्स को सुधारवादी और नियम-आधारित रखना चाहता है। लूला की जीत भारत के लिए समान विचारधारा वाले साझेदार को मजबूत करेगी, जबकि बोल्सोनारो की जीत ब्रिक्स की सक्रियता को कमजोर कर सकती है।

ब्राजील की घरेलू चुनौतियां

मतदाताओं के लिए अपराध, शिक्षा और अर्थव्यवस्था मुख्य मुद्दे हैं। देश का कर्ज 2026 के अंत तक जीडीपी का करीब 98 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान है। अमेजन क्षेत्र में आपराधिक नेटवर्क सक्रिय हैं और न्यायपालिका पर भी सवाल उठे हैं।