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मनमानी करने वाले पायलटों के लिए बनेंगे नए नियम? फ्लाईदुबई घटना ने 9/11 के दौर की एविएशन सिक्योरिटी पर खड़े किए सवाल

Published: Sat, 10 Oct 2026 11:38 PM (GMT+05:30)

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत कॉकपिट दरवाजा बाहरी घुसपैठ रोक सकता है, लेकिन अंदर मौजूद व्यक्ति के हिंसक होने पर यह बेअसर हो जाता है।

9/11 वाली विमान सुरक्षा व्यवस्था अब बदलने की जरूरत है (फोटो- रॉयटर)

9/11 वाली विमान सुरक्षा व्यवस्था अब बदलने की जरूरत है (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. भारतीय कप्तान स्मित मच्छर फ्लाईदुबई घटना में घायल हो गए थे

  2. विमान को क्रू सदस्यों की मदद से सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर 2026 को हुए कॉकपिट हमले ने विमानन सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस घटना में ओमानी को-पायलट ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छर पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे विमान करीब 16,000 फीट अचानक नीचे गिर गया।

हमलावर को-पायलट ने कथित तौर पर विमान को क्रैश करने की कोशिश की थी। घायल कप्तान ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, यात्रियों और क्रू सदस्यों ने हमलावर को काबू कर लिया।

बोर्ड पर मौजूद एक और पायलट और स्टैंडबाय क्रू की मदद से विमान पर नियंत्रण वापस लिया गया और इसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। फ्लाइट में सवार सभी 182 लोग (जिनमें 8 क्रू सदस्य शामिल) सुरक्षित रहे।

यह घटना 9/11 के आतंकी हमलों के 25 साल बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। 2001 के हमलों के बाद कॉकपिट के दरवाजों को मजबूत किया गया, यात्री स्क्रीनिंग सख्त की गई और एयर मार्शल जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। लेकिन ये उपाय मुख्य रूप से बाहरी हमलावरों को रोकने के लिए थे। फ्लाईदुबई कांड में खतरा खुद फ्लाइट क्रू से आया।

क्या कॉकपिट डोर पर्याप्त है?

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत कॉकपिट दरवाजा बाहरी घुसपैठ रोक सकता है, लेकिन अंदर मौजूद व्यक्ति के हिंसक होने पर यह बेअसर हो जाता है। 2015 के जर्मनविंग्स हादसे (जिसमें को-पायलट ने कप्तान को बाहर करके विमान क्रैश कर दिया था) के बाद यूरोप में दो लोगों के कॉकपिट में रहने की सिफारिश की गई थी, लेकिन बाद में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।

पायलट स्क्रीनिंग पर सवाल

घटना ने पायलटों की बैकग्राउंड जांच, मानसिक स्वास्थ्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझा करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। पायलट एक देश में ट्रेनिंग लेते हैं, दूसरे में लाइसेंस और तीसरे में नौकरी। जानकारी का आदान-प्रदान हमेशा एक समान नहीं होता। इजरायल ने अब अपने देश आने वाली फ्लाइट्स के पायलटों की जांच सख्त करने का संकेत दिया है।

एयरलाइन अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई पायलट जानबूझकर हिंसा पर उतारू हो जाए तो उसे पूरी तरह रोकना बहुत मुश्किल है। रयानएयर के सीईओ माइकल ओ’लियरी ने कहा कि अगर कॉकपिट में कोई पागल व्यक्ति हो तो उसके लिए कानून बनाना कठिन है।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रॉस-बॉर्डर बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, क्रू ट्रेनिंग और आपात स्थितियों से निपटने की प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, लेकिन अतिरिक्त पाबंदियां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने का कारण भी बन सकती हैं।