यूरोप में प्रदर्शनों से बढ़ा तनाव, फ्रांस से अल्बानिया तक सड़कों पर उतरे लाखों लोग
यूरोप के कई देशों में महंगे घर, बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

पूरे यूरोप में बढ़ा तनाव।
HighLights
फ्रांस में लाखों लोग सड़कों पर, हुई झड़पें और गिरफ्तारियां।
अल्बानिया में हिंसक प्रदर्शन, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी।
इटली, स्पेन, पुर्तगाल में भी आवास संकट पर प्रदर्शन।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। महंगे घर, आसमान छूता किराया, बढ़ती जीवन-यापन की लागत और सरकारी नीतियों से नाराजगी यूरोप के कई देशों में सड़कों पर दिखाई दे रही है।
फ्रांस की राजधानी पेरिस से लेकर अल्बानिया के तिराना, इटली के शहरों, स्पेन के मैड्रिड और पुर्तगाल के लिस्बन तक विरोध-प्रदर्शन उग्र होते जा रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, आंसू गैस छोड़ी गई और गिरफ्तारियां की गईं। इन आंदोलनों में कहीं आवास संकट और पेंशन प्रमुख मुद्दे हैं, तो कहीं महंगी शिक्षा, सरकारी परियोजनाओं और सुरक्षा नीतियों के खिलाफ गुस्सा सामने आया है।
फ्रांस में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में गृह मंत्रालय के अनुसार करीब 4.10 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि आयोजक सीजीटी यूनियन ने यह संख्या आठ लाख बताई। पेरिस की सड़कों पर 2.50 लाख लोगों के उतरने के दावे भी किए गए।
पुलिस ने देशभर में करीब 1314 लोगों को गिरफ्तार किया। पेरिस, ल्योन, लिले, मार्सिले और कई अन्य शहरों में झड़पों की खबरें आईं। राजधानी में 65 लोगों को गिरफ्तार किया गया। लोगों पर हेलीकॉप्टरों और ड्रोन के जरिये भी निगाह रखी गई।
झड़पों में 53 पुलिस अधिकारी घायल हुए। 75 जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुईं और 24 दुकानों में लूटपाट भी की गई। वहीं, अल्बानिया में हुए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों को फ्रांस के आंदोलन की बताने पर फ्रांस के दो चैनलों, सीन्यूज और फ्रांसइंफो ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी है।
फ्रांस के प्रदर्शनकारी समूहों और यूनियनों ने 31 अक्टूबर और पांच नवंबर को फिर से देशव्यापी प्रदर्शनों की घोषणा की है। 2018 से चर्चा में आए येलो वेस्ट ने कहा कि अगले शनिवार को पेरिस में टाउन हाल और नेशनल असेंबली के बाहर धरना दिया जाएगा।
संगठन ने कहा कि स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक और खेतों से लेकर कार्यस्थलों तक सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। वहीं, देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस यूनियनों ने कहा है कि उनके पास इतने कर्मचारी नहीं हैं जिनकी पूरे देश में लंबे समय तक तैनाती की जा सके।
अल्बानिया: नए सिरे से हिंसक प्रदर्शन शुरू
रायटर के अनुसार, अल्बानिया में प्रधानमंत्री एडी रामा द्वारा प्रदर्शनों पर रोक के नए उपायों की घोषणा के बाद रविवार को राजधानी तिराना में नए सिरे से प्रदर्शनकारी सड़कों पर आ गए। पीएम रामा ने हिंसा करनेवालों पर पांच लाख लेक (6188 डॉलर) का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। बारिश के बीच लोग शिक्षा मंत्रालय के बाहर जमा हो गए और पीएम रामा के कार्यालय की तरफ बढ़ने लगे।
उन्होंने सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के लिए रखी गई कुर्सियों को आग लगा दी गई। इससे पहले शनिवार को सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया।
अधिकारियों के अनुसार, कई सरकारी इमारतों पर हमले हुए, उनमें आग लगाने के प्रयास किए गए और पुलिस पर पटाखे जैसी चीजें फेंकी गईं। झड़पों में 300 से अधिक प्रदर्शनकारी व पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
इटली: पुलिस पर पथराव, पटाखों से भी हमला
एपी के अनुसार, इटली में हजारों की संख्या में लोगों ने मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स, बोलोग्ना और फ्लोरेंस शहरों में प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलों, पत्थरों और पटाखों से हमला किया। रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम में भी प्रदर्शनकारियों ने घुसने का प्रयास किया।
आठ शहरों में नौ लोग गिरफ्तार किए गए, जबकि 371 को हिरासत में लिया गया। इनमें 110 नाबालिग थे। पीएम जार्जिया मेलोनी ने देश में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।
स्पेन: मैड्रिड में विरोध शिविर बना आंदोलन का केंद्र
मैड्रिड में प्रदर्शनकारियों ने पेंशन को महंगाई के अनुरूप बढ़ाने, न्यूनतम पेंशन में सुधार और पेंशन व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ सुरक्षा उपायों की मांग की। वहीं, आवास संकट के खिलाफ प्यूर्टा डेल सोल चौक पर शुरू हुआ विरोध शिविर भी आंदोलन का केंद्र बन गया है।
पुर्तगाल: पुलिस-प्रदर्शनकारियों में छिटपुट झड़प
लिस्बन में आवास संकट के खिलाफ लगाए गए विरोध शिविर को पुलिस ने रविवार तड़के हटा दिया। इस दौरान गिरफ्तारियां हुईं और कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। प्रदर्शनकारी किराये पर नियंत्रण बनाए रखने और घरों से बेदखली आसान बनाने वाले प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप फिर बोले, फ्रांस की हिंसा के लिए अवैध अप्रवासी जिम्मेदार
एएनआई के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस में अशांति के लिए आव्रजन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस ने ऐसे लोगों को देश में आने दिया, जो उसकी संस्कृति और विरासत का सम्मान नहीं करते। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पहले भी ट्रंप की ऐसी टिप्पणियों को खारिज किया है।
शनिवार को जार्जिया में ट्रंप ने कहा, "फ्रांस अभी जल रहा है क्योंकि उसने अपने दरवाजे ऐसे लोगों के लिए खोल दिए हैं जो उससे नफरत करते हैं। ये वे लोग हैं जो फ्रांस से नफरत करते हैं। वे वहां के लोगों से नफरत करते हैं। वे वहां जाकर बस जाते हैं, लेकिन उन्हें वहां की इमारतें पसंद नहीं आतीं, स्मारक पसंद नहीं आते, पेंटिंग पसंद नहीं आतीं। उन्हें फ्रांस की कोई भी बात पसंद नहीं है। और पता है, ऐसे लोगों के साथ क्या करना चाहिए? उन्हें कभी भी अपने देश में नहीं आने देना चाहिए। और हम बिल्कुल यही कर रहे हैं।"
