विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले बड़ी साजिश: तंगेल में ऐतिहासिक मंदिर को बनाया निशाना, मां दुर्गा की मूर्तियां तोड़ी गईं

Published: Sun, 04 Oct 2026 05:30 AM (IST)

बांग्लादेश के तंगेल जिले के मिर्जापुर उपजिला स्थित जमुर्की पश्चिमपाड़ा में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर पर असामाजिक तत्वों द्वारा हमला किए जाने का अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिर को बनाया निशाना, मूर्तियां तोड़ी गईं

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिर को बनाया निशाना, मूर्तियां तोड़ी गईं

HighLights

  1. मूर्तियों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था, सिर्फ रंग-रोगन का कार्य शेष था 

  2. कानून-व्यवस्था की स्थिति और अल्पसंख्यकों तथा प्रेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

आईएएनएस, ढाका। बांग्लादेश के तंगेल जिले के मिर्जापुर उपजिला स्थित जमुर्की पश्चिमपाड़ा में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर पर असामाजिक तत्वों द्वारा हमला किए जाने का अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है।

आगामी दुर्गोत्सव की तैयारियों के बीच, लगभग 85 वर्षों से चली आ रही परंपरा वाले इस मंदिर में मां दुर्गा समेत सात सुंदर और लगभग तैयार मूर्तियों को खंडित कर दिया गया।

बुधवार रात और गुरुवार सुबह के बीच हुई इस दुखद घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय को गहरे शोक और असुरक्षा की भावना में डाल दिया है।

जमुर्की आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बकाली के अनुसार, मूर्तियों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था और केवल रंग-रोगन का कार्य शेष था।

बुधवार रात तक सभी लोग मंदिर में थे, लेकिन गुरुवार सुबह जब वे पहुंचे, तो मूर्तियों को टूटा हुआ पाया। इस घटना से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

हालांकि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कड़े सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया है, लेकिन अल्पसंख्यकों के मन में डर का माहौल बना हुआ है।

जुलाई 2024 के बाद से ही देश में लगातार इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। तीन महीनों में 162 पत्रकारों पर हमले बांग्लादेश में केवल धार्मिक अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मीडियाकर्मी भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

मीडिया इनिशिएटिव फार डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन महीनों में देश भर में 112 अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 162 पत्रकारों को हमलों, धमकियों और कानूनी उत्पीड़न का शिकार बनाया गया है। इसमें सबसे अधिक 89 पत्रकार दैनिक समाचार पत्रों से जुड़े थे।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत नहीं दे सकता कोई समयसीमा: उच्चायुक्त

भारत ने स्पष्ट किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी पर कोई समयसीमा नहीं दी जा सकती। ढाका में एक चर्चा के दौरान भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि यह मामला एक सुव्यवस्थित और स्थापित कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है।

अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए जनआंदोलन के बाद सत्ता छोड़कर भारत आईं 79 वर्षीय हसीना के प्रत्यर्पण की मांग ढाका लगातार कर रहा है।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि इस अनुरोध की कानूनी समीक्षा की जा रही है। उच्चायुक्त ने यह भी साफ किया कि उन्हें भारतीय वायुसेना या थलसेना द्वारा नहीं लाया गया था। इस कानूनी प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।