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कौन हैं तारिक रहमान? 17 साल का वनवास खत्म कर बन सकते हैं बांग्लादेश के पीएम, 4 साल की उम्र में गए थे जेल

Published: Fri, 13 Feb 2026 09:47 AM (IST)

Tarique Rahman Profile: बांग्लादेश चुनाव 2026 के बाद वोटों की गिनती जारी है, जिसमें तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने ...और पढ़ें

कौन हैं तारिक रहमान?

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश में हुए चुनाव के बाद वोटों (Bangladesh Election Results 2026) की गिनती जारी है। 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान (Tarique Rehman) की पार्टी बीएनपी बहुमत का आकड़ा पार कर चुकी है।

आज से बांग्लादेश की राजनीति में एक नये अध्याय की शुरुआत हो चुकी है और तारिक रहमान का पीएम बनना तय माना जा रहा है। ऐसे में चलिए जानते हैं कौन हैं तारिक रहमान और पीएम बनने के लिए उन्हें कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे हैं। तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ।1971 में बांग्लादेश की आजादी की जंग के दौरान तारिक महज चार साल के थे और उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया था। यही वजह है कि उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें 'युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल'बताकर सम्मानित करती है।

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पिता जिया-उर-रहमान बीएनपी के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति थे। जबकि उनकी मां खालिदा जिया 3 बार देश की प्रधानमंत्री रहीं। तारिक को बचपन से ही राजनीति में रुचि थी। 1991 में तारिक ने अपनी मां खालिदा जिया को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई।

17 साल का निर्वासन का शिकार

तारिक रहमान जेल, यातनाएं और राजनीतिक साजिशों के शिकार भी हुए हैं और 17 साल का निर्वासन भी झेला है। तारिक 17 सालों तक लंदन में रहे, तारिक रहमान देश से भले दूर थे, लेकिन राजनीति से जुड़े रहे। वह वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और डिजिटल सभाओं के जरिए अपने पार्टी का नेतृत्व करते रहे।

84 मामले

तारिक रहमान पर दर्जनों आपराधिक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों समेत लगभग 84 केस थे। इन सभी दोषों को उन्होंने हमेशा राजनीतिक दबाव का नतीजा बताया। सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने मार्च 2007 में तारिक को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया गया।

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तारिक को जेल जाने के बाद वहां यातनाएं भी झेलनी पड़ीं, सितंबर 2008 में जमानत पर रिहा होने के बाद वह चिकित्सा के बहाने लंदन चले गए और 17 साल तक स्वनिर्वासन में रहे और वहीं, से बीएनपी की कमान संभाले रखी।

तारीक रहमान का राजनीतिक सफर

साल 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश के कानूनी माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आलम यह हुआ कि 2026 की शुरुआत तक ज्यादातर बड़े मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया। जिन मामलों में उन्हें बरी किया गया, उनमें शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले का मामला भी शामिल है, जिसमें उन्हें 2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

शेख हसीना की सत्ता से बेदखल होने के बाद तारिक रहमान ने नई राजनीतिक जमीन तैयार की। अतंरिम सरकार बनने और कानूनी अड़चने हटने के बाद दिसंबर 2025 में तारिक ढाका वापस लौट आए। वह लंदन में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से पहले ही मिल चुके थे। जिससे बांग्लादेश की राजनीति में उनके बदलाव का संकेत मिल गया था।

17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान की पार्टी 151 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है और कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 13वें संसदीय चुनाव में रहमान ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों संसदीय सीट से बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

बोगुरा उनके परिवार का पुश्तैनी गढ़ है, जबकि ढाका-17 सीट देश की राजधानी का दिल मानी जाती है। इन दोनों सीटों से जीत ने उनके राजनीतिक कद को और मजबूत किया है।

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