काबुल, एएनआइ। तालिबान ने साफ किया है कि वह आतंकी संगठन आइएस को अफगानिस्तान में नहीं पनपने देगा। वह मध्य एशिया और चीन के उईगर आतंकी संगठनों को भी अपने कब्जे वाले इलाके में शरण नहीं लेने देगा। अतिवादी संगठन ने दावा किया है कि अफगानिस्तान की अन्य देशों से लगने वाली सीमाओं के 90 फीसद हिस्से पर उसने कब्जा कर लिया है। ये बातें तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने कही हैं।

तालिबान का यह बयान अमेरिकी रक्षा मंत्री लायड आस्टिन के उस कथन के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की निगाह आतंकी संगठनों पर होगी, न कि तालिबान पर। मुजाहिद ने कहा है कि हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि आइएस या किसी अन्य आतंकी संगठन को हम अपने कब्जे वाले इलाके में नहीं पनपने देंगे, न ही ऐसे संगठनों को देश में प्रवेश करने देंगे।

तालिबान की ओर से यह बयान अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से कुछ हफ्ते पहले आया है। लेकिन विदेशी सैनिकों की वापसी से पहले ही तालिबान ने अफगानिस्तान में अपने हमले बढ़ा दिए हैं और लगातार नए इलाकों पर कब्जा करता जा रहा है। देश के 419 जिलों में से करीब आधे जिलों पर तालिबान अभी तक कब्जा कर चुका है। लेकिन 34 प्रांतों की राजधानी में से किसी पर कब्जा करने में तालिबान सफल नहीं हो सका है। उन पर अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार का ही कब्जा है। अफगानिस्तान में संयुक्त सेनाओं के प्रमुख जनरल मार्क मिली ने इसकी पुष्टि की है।

अफगानिस्तान को आतंकियों की जन्नत बनाना चाहता है तालिबान : गनी

इससे पहले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने बुधवार को कहा कि तालिबान के आतंकी संगठन अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मुहम्मद के साथ गहरे रिश्ते हैं। तालिबान अफगानिस्तान को आतंकियों की जन्नत बनाना चाहता है।टोलो न्यूज के अनुसार, गनी ने काबुल स्थित स्पेशल आपरेशन कमांड सेंटर में जवानों को संबोधित करते हुए कहा, 'सरकार ऐसा कतई नहीं होने देगी।'

अफगानी राष्ट्रपति ने देश के विशेष अभियान बल के जवानों को हर प्रकार की मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अगर देश के लिए जंग लड़ते हुए सुरक्षा बल का कोई जवान शहीद होता है तो उसके परिवार का पूरा खयाल रखा जाएगा। गनी ने कहा कि अफगानिस्तान ने तालिबान के साथ शांति वार्ता के लिए दोहा में उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, 'अब्दुल्ला ने कुछ मिनट पहले ही मुझे बताया है कि तालिबान शांति के लिए इच्छुक नहीं है। हम प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे.. यह जताने के लिए कि हम शांति के लिए कुर्बानी देने को भी तैयार हैं, लेकिन तालिबान इसके लिए तैयार नहीं है और हमें इसी आधार पर निर्णय लेना चाहिए।'

Edited By: Shashank Pandey