बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की संदिग्ध हालात में मौत, आवामी लीग ने बताई सुनियोजित हत्या
बांग्लादेश के बारिसाल जिले में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी का शव उनके समाचार कक्ष में फंदे से लटका मिला, जिससे देश में सनसनी फैल गई है।

बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की संदिग्ध हालात में मौत। (आईएएनएस)
HighLights
पुलक चटर्जी का शव समाचार कक्ष में फंदे से लटका मिला।
अवामी लीग ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है।
घटना ने अल्पसंख्यकों और पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश के बारिसाल जिले में दैनिक 'समाकाल' के पूर्व ब्यूरो प्रमुख और वरिष्ठ हिंदू पत्रकार 57 वर्षीय पुलक चटर्जी का शव उनके ही समाचार कक्ष में फंदे से लटका मिलने से पूरे देश में सनसनी फैल गई है। इस दुखद और हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों और पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि मौत के असली कारणों की जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएगी, लेकिन इस घटना ने कई अनसुलझे और दर्दनाक पहलू छोड़ दिए हैं। घटना के सामने आने के बाद अवामी लीग ने इसे हत्या करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
यह पूरी तरह से एक सुनियोजित हत्या- आवामी लीग
पार्टी ने घटना स्थल से सामने आई तस्वीर का हवाला देते हुए कहा है कि मृतक के दोनों पैर जमीन पर थे, घुटने मुड़े हुए थे और शरीर लगभग सीधी स्थिति में था। इस तरह से किसी की स्वाभाविक मौत या आत्महत्या संभव नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक सुनियोजित हत्या है जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।
अवामी लीग ने इस घटना की तुलना 2001 से 2006 के बीच के काले दौर से की है, जब देश में अल्पसंख्यकों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार हुए थे।
पार्टी के अनुसार, पुलक चटर्जी ने उस दौर के अत्याचारों को अपनी आंखों से देखा था और एक पत्रकार के रूप में उसके गवाह रहे थे। वे अल्पसंख्यक भी थे और पत्रकार भी, इसलिए उनकी आवाज को हमेशा के लिए खामोश करने की यह कायराना कोशिश दरअसल उस पूरे इतिहास को दफनाने का कुचक्र है। इस घटना से देश भर के पत्रकारों और अल्पसंख्यक समुदायों में गहरा शोक और भारी रोष व्याप्त है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
