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सुपर अल नीनो की वजह से अगले 6 महीने में जा सकती है 4.50 लाख लोगों की जान, भारत पर भी खतरा; रिपोर्ट में दावा

Published: Wed, 23 Sep 2026 11:33 PM (IST)

अध्ययन में कहा गया है कि अल निनो के कारण वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। ...और पढ़ें

सुपर अल नीनो से दुनियाभर में 6 महीने जा सकती है चार लाख लोगों की जान

सुपर अल नीनो से दुनियाभर में 6 महीने जा सकती है चार लाख लोगों की जान

HighLights

  1. ये मौतें गर्मी के मौसम में और बढ़ सकती हैं

  2. भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन दुनियाभर में एक गंभीर समस्या बन गया है, बेमौसम बरसात और आपदाओं ने पृथ्वी का संतुलन बिगाड़ दिया है। हर साल फसलों के खराब होने से भुखमरी और बीमारियों बढ़ रही हैं जिससे लोगों की मौत रही है।

इस बीच, शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के एक नए अध्ययन के अनुसार, वर्तमान में चल रहे 'सुपर अल निनो' के कारण सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4 लाख 51 हजार अतिरिक्त गर्मी से जुड़ी मौतें हो सकती हैं। इनमें भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतें शामिल हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि अल निनो के कारण वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। इससे सामान्य वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक अत्यधिक गर्म दिन आने की संभावना है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के कारण 20 साल बाद आने वाले तापमान जैसी होगी।

भारत पर प्रभाव

भारत में अनुमानित अतिरिक्त मौतों में से लगभग आधी (करीब 7,400) दिसंबर से फरवरी के बीच हो सकती हैं। अध्ययन के अनुसार, ये मौतें गर्मी के मौसम में और बढ़ सकती हैं।

अन्य प्रभावित क्षेत्र

  • अफ्रीका के साहेल क्षेत्र (नाइजीरिया, सूडान, नाइजर, चाड) में 66,800 अतिरिक्त मौतें
  • नाइजीरिया में अकेले 31,400
  • इंडोनेशिया में 19,300
  • दक्षिण-पूर्व एशिया (फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया) में 19,400
  • ब्राजील में 13,300

आपातकालीन कार्रवाई की जरूरत

अध्ययन के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि हम लंबे समय से फसलों पर तापमान के प्रभाव का अनुमान लगा सकते थे। अब हम मौत जैसी सबसे बुरी स्थिति का भी अनुमान लगा सकते हैं। यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं को बताती है कि कहां तुरंत कार्रवाई करके हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

अध्ययन में गर्मी की चेतावनी, कमजोर वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना, कूलिंग सेंटर और हाइड्रेशन स्टेशन बनाने, श्रमिकों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।