कोलंबो, आइएएनएस। श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव के दो मुख्य उम्मीदवार, पूर्व रक्षा मंत्री गोतबया राजपक्षे और कैबिनेट मंत्री साजित प्रेमदासा, एक गृह युद्ध के घावों से उबरने के लिए एक देश में दो ध्रुवीय विरोधों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि देश हाल ही में ईस्टर के मौके पर हुए क्रूर आतंकी हमलों से पीड़ित है।

जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्र का आठवां प्राथमिक चुनाव शनिवार की सुबह होने वाला है, जिसमें 2.2 करोड़ की आबादी में से अनुमानित 1.6 करोड़ लोग ही वोट देने के लिए योग्य हैं। हालांकि चुनाव मैदान में रिकॉर्ड 35 उम्मीदवार हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व राष्ट्रपति के बेटे प्रेमदासा जो अलगाववादी तमिल टाइगर्स द्वारा मारे गए थे। उन्होंने इस  खूनी संघर्ष को समाप्त किया है। राष्ट्रवादी पार्टी श्रीलंका पोडुजाना पेरमुना (एसएलपीपी) के उम्मीदवार गोताबैया एक सेवानिवृत्त 70 वर्षीय सैनिक हैं, जिन्होंने उस समय के दौरान श्रीलंका के रक्षा विभाग का कार्यभार संभाला था, जब उनके बड़े भाई, महिंद्रा राजपक्षे राष्ट्रपति (2005-2015) थे।

 वह 1971 में श्रीलंकाई सेना में शामिल हो गए, जब 1948 में अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने वाली पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश को अभी भी सीलोन के नाम से जाना जाता था। सेना से सेवानिवृत्त होने और अमेरिका में सात साल रहने के बाद, गोतबया 2005 में अपने भाई महिंदा राजपक्षे को राष्ट्रपति चुनाव अभियान में मदद करने के लिए लौटें थे।

उनके कार्यकाल के दौरान, गोतबया पर एक हमला किया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने उस कार को उड़ाने का प्रयास किया जिसमें वो यात्रा कर रहे थे।  जिस वाहन से हमला किया गया वह वाहन विस्फोटक से भरा हुआ था। हालांकि, सुरक्षा दल ने हमले को नाकाम कर दिया और गोतबया बच गया। अपने भाई महिंदा के साथ, गोतबया एक ऐसे परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे आबादी के एक वर्ग द्वारा हीरो के तौर पर देखा जाता है। जो कि लिट्टे के साथ लगभग तीन दशक लंबे युद्ध को समाप्त करने में कामयाब रहे।

Posted By: Ayushi Tyagi

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