कोलंबो, प्रेट्र। श्रीलंका के नवनियुक्त सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शैवेंद्र सिल्वा युद्ध अपराध के आरोपों में घिर गए हैं। उन पर गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने इससे इन्कार करते हुए सैन्य कार्रवाई को मानवीय अभियान करार दिया है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेन ने पिछले हफ्ते सिल्वा को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया था। साल 2009 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LITTE) के खिलाफ अंतिम लड़ाई के दौरान सिल्वा ने सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व किया था।

उनकी टुकड़ी पर नागरिकों और अस्पतालों पर हमला करने और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे तमिल नागरिकों की मानवीय सहायता रोकने के आरोप लगे थे। उस दौर में श्रीलंकाई सेना की ओर से किए मानवाधिकारों के हनन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में 2013 में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में सिल्वा का भी जिक्र है।

सिल्वा ने रविवार को कैंडी में पत्रकारों से कहा, 'कोई युद्ध अपराध नहीं हुआ था। हमने एक आतंकी समूह से लोगों को मुक्त कराने के लिए मानवीय अभियान चलाया था। तमिल नागरिकों ने आतंकियों से मुक्त कराने की हमारी कार्रवाई की तारीफ की थी। मैंने बतौर एक सैनिक अपना काम किया था।'

अमेरिका, कनाडा और ईयू ने जताई चिंता
सिल्वा की नियुक्ति की अमेरिका और अल्पसंख्यक तमिलों ने आलोचना की है। अमेरिका के अलावा कनाडा और यूरोपीय यूनियन (EU) के दूतावासों ने भी सिल्वा को सेना प्रमुख बनाए जाने पर चिंता जताई है।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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