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'भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी श्रीलंका की जमीन', राष्ट्रपति दिसानायके ने राजनाथ सिंह को दिया सुरक्षा का भरोसा

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:25 PM (IST)

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आश्वासन दिया कि श्रीलंका की धरती का उपयोग ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, कोलंबो। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि सुरक्षित समुद्री रास्ते, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और निर्बाध समुद्री व्यापार मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहनी चाहिए क्योंकि ये हिंद महासागर क्षेत्र के विकास व समृद्धि के लिए बेहद आवश्यक हैं।

राजनाथ तीन दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को कोलंबो पहुंचे थे और 38 वर्षों में श्रीलंका का दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं। इससे पहले 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री केसी पंत ने श्रीलंका की यात्रा की थी।

राजनाथ ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के साथ बेहद सार्थक बैठक के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उक्त बातें कहीं। राष्ट्रपति के साथ बैठक में उन्होंने दोहराया कि सभ्यतागत रूप से जुड़े जुड़वां देशों, करीबी पड़ोसियों और समुद्री साझेदारों के तौर पर भारत व श्रीलंका इस क्षेत्र की सुरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

इस दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्थिक, समुद्री एवं क्षेत्रीय साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। राष्ट्रपति दिसानायके ने दोहराया कि श्रीलंका कभी भी अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के हितों के विरुद्ध किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा।

कोलंबो में 'हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग- आपस में जुड़े भविष्य वाले सभ्यतागत साझेदार' विषय पर संबोधन में राजनाथ ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बंदरगाह साझा आर्थिक विकास के इंजन बन सकते हैं, जबकि उनके समुद्री उद्योग इस क्षेत्र की भविष्य की समृद्धि के लिए प्रेरक शक्ति बन सकते हैं।

भारत और श्रीलंका मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने में सबसे करीबी साझेदार बनने की अच्छी स्थिति में हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता और खुले व्यापारिक मार्गों को सुनिश्चित करना क्षेत्र के विकास व समृद्धि के लिए बहुत आवश्यक है।

लिहाजा यह जरूरी है कि हम एक अनुकूल व सुरक्षित समुद्री माहौल बनाने के लिए मिलकर काम करें और उभरती समुद्री चुनौतियों से तत्काल निपटने के लिए तैयार रहें, इससे पहले कि वे हमारे विकास हितों व हमारे क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन जाएं।


राजनाथ ने कहा कि श्रीलंका, हिंद महासागर क्षेत्र में अहम रणनीतिक स्थान पर स्थित है, जहां से व्यस्त व्यापारिक मार्ग गुजरते हैं। ये मार्ग न केवल वैश्विक व्यापार की जीवन रेखा हैं, बल्कि हमारे विकास व प्रगति की दिशा के साथ-साथ हमारे क्षेत्र की सुरक्षा एवं संरक्षा भी तय करते हैं।

भारत और श्रीलंका दोनों ही समुद्री देश हैं जो इस साझे महासागर से जुड़े हैं। यह कोई काल्पनिक सिद्धांत नहीं, बल्कि रोजमर्रा की हकीकत है - जो हमारे व्यापार, हमारी सुरक्षा और हमारी नियति, सभी को आकार देती है।

चूंकि हिंद महासागर गहरे रणनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, इसलिए भारत व श्रीलंका को उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी कोशिशों में तालमेल बिठाना होगा और अपनी सामूहिक क्षमताओं का इस्तेमाल करना होगा।

सावधानी से निपटाए जाएं मछुआरों से जुड़े मुद्दे

भारत को सच्चा विश्व मित्र बताते हुए राजनाथ ने साझा पड़ोस में रचनात्मक व भरोसेमंद भूमिका निभाने के भारत के संकल्प को दोहराया। मछुआरों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संबंधित कानूनों और भौगोलिक अधिकार-क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विवादों को पारस्परिक लाभ के तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही इनसे जुड़े मुद्दों को उचित सावधानी और गंभीरता से निपटाया जाना चाहिए क्योंकि ये सीधे तौर पर आजीविका पर प्रभाव डालते हैं।

मिलकर काम करें दोनों देशों की एजेंसियां

रक्षा मंत्री ने कहा, "दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों, नौसेनाओं और तटरक्षक बलों को अवैध मछली पकड़ने, संदिग्ध जहाजों पर नजर रखने, मादक पदार्थों की तस्करी, तस्करी, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े अन्य खतरों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।"

उन्होंने मंगलवार को कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचे आइएनएस उदयगिरि के संबंध में कहा कि इस फ्रिगेट का दौरा दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए श्रीलंका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के भारत के संकल्प और इच्छा का प्रतीक है। इस जहाज का चालक दल श्रीलंका नौसेना के साथ सद्भावना कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा और पर्यटन व सांस्कृतिक स्थलों का दौरा करेगा।

श्रीलंका की पीएम से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

राजनाथ ने प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या से भी मुलाकात की और विकास सहयोग, शिक्षा तथा भारत-श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक व सभ्यतागत संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यात्रा के दौरान श्रीलंकाई वायुसेना के लिए एल-70 गन को अपग्रेड करने और दोनों देशों के एनसीसी व नेशनल डिफेंस कालेजों के बीच सहयोग के लिए एमओयू का आदान-प्रदान भी किया।

रक्षा मंत्री ने कोलंबो में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (आइपीकेएफ) स्मारक पर जाकर बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने कोलंबो के पवित्र गंगारामया मंदिर में भगवान बुद्ध का आशीर्वाद लिया। राजनाथ ने बताया कि उन्होंने श्रीलंका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से भी बातचीत की; जिनमें से कई अधिकारियों ने भारत में प्रशिक्षण लिया है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)