दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की ट्रंप को दो टूक, दबाव में ईरान नहीं भेजेंगे सेना
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के दबाव को खारिज करते हुए साफ कर दिया ...और पढ़ें

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की ट्रंप को दो टूक, दबाव में ईरान नहीं भेजेंगे सेना (फोटो- सोशल मीडिया)
HighLights
ली जे-म्युंग बोले- ईरान के खिलाफ युद्ध में सैनिक या सैन्य संसाधन नहीं भेजेंगे
होर्मुज और लाल सागर में केवल अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर रहेगा ध्यान
न्यूयॉर्क टाइम्स, सियोल। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के दबाव को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि उनका देश ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले युद्ध में सैनिक या सैन्य संसाधन नहीं भेजेगा।
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया किसी ऐसे अभियान में भी शामिल नहीं होगा, जिसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थन के तौर पर देखा जाए।
ली ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “इस युद्ध में शामिल होने या दखल देने के लिए सैनिकों की तैनाती या सैन्य संसाधनों को नहीं भेजा जाएगा।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद करने से सियोल के इनकार पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।
ली ने बताया कि लड़ाई में शामिल होने के बजाय दक्षिण कोरिया सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती रोधी अभियान के लिए तैनात अपने नौसेना के विध्वंसक पोत और सहायक जहाजों के संचालन का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
ये जहाज अगर लाल सागर या होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तैनात किए जाते हैं तो उनका उद्देश्य केवल दक्षिण कोरियाई तेल टैंकरों और अन्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य अभियान में नहीं किया जाएगा। सियोल का रुख है कि अपने व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अलग बात है और ईरान के खिलाफ युद्ध में सैन्य रूप से शामिल होना अलग।
ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह सियोल से किस तरह की सैन्य मदद चाहते हैं। हालांकि, पिछले महीने उन्होंने कहा था कि उन्होंने ली से संघर्ष में थोड़ी मदद करने को कहा था। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया था।
पिछले महीने ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सालाना संयुक्त सैन्य अभ्यासों में से एक को एकतरफा रूप से कम कर दिया था। उन्होंने इन अभ्यासों को महंगा और उत्तर कोरिया के प्रति अनुचित तथा शत्रुतापूर्ण बताया था।
ट्रंप ने यह भी कहा था कि उनके कार्यकाल में उत्तर कोरिया का व्यवहार उनके प्रति “बिना किसी खतरे वाला और सम्मानजनक” रहा तथा उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ उनके “बहुत अच्छे संबंध” हैं।
