जेनेवा, एएनआइ। कार्यकर्ता शुएब लोन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के कार्यक्रम में कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा दमदारी से उठाया। सीमा पार आतंकवाद अभी तक भारत के लिए मुख्य चिंता का कारण बना हुआ है। पाकिस्तान सीमा पार अपने छद्मयुद्ध के लिए आतंकी गतिविधियों को समर्थन देता है। इसका एकमात्र उद्देश्य पड़ोसी राज्य के लोगों के दिमाग में आतंक पैदा करना है।

महिलाओं को अत्याचारों के विरुद्ध बोलने से रोका गया

कश्मीर में आतंकवाद से पीडि़त परिवार के सदस्यों खास तौर से महिलाओं के प्रतिनिधि के रूप में शुएब ने कहा, 'पीड़तों और परिवारों पर विशेष रूप से महिलाओं को लेकर चुप्पी साध ली जाती है।

एक कार्यकर्ता के रूप में मैंने ऐसी कई घटनाओं को जुटाया है जहां महिलाओं को इन अत्याचारों के विरुद्ध बोलने से रोका गया। यह सर्वविदित है कि किस तरह आतंकवादी स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध अपने अभियान के लिए स्थानीय निवासियों और उनके स्थानों का उनकी इच्छा के विरुद्ध उपयोग करते हैं।

'कश्मीर में महिलाओं की त्रासदी का उल्लेख करते हुए शुएब ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की इच्छा के विरुद्ध उनसे काम कराने की कई घटनाएं हुई हैं। खाना बनाना, सफाई कराना, आतंकियों को शरण देने के साथ ही यौन हिंसा और महिलाओं पर हमले की घटनाएं हुई हैं।

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हम पीड़ित परिवारों और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को एकसाथ लाने के लिए बुनियादी स्तर पर काम कर रहे हैं। उनकी आवाज को बल देने के साथ ही पुनर्वास के लिए समुदाय की अगुआई वाले प्रयासों को साझा मंच देने का प्रयास कर रहे हैं।

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Edited By: Shashank Mishra

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