फ्रांस में प्रदर्शनों से पहले अफ्रीकी मूल के लोगों पर फायरिंग, एक की मौत; भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
फ्रांस में शनिवार को देशव्यापी प्रदर्शनों से पहले शुक्रवार को राजधानी पेरिस से सटे शहर ट्रेप्स में एक बंदूकधारी ने ...और पढ़ें

फ्रांस में प्रदर्शनों से पहले अफ्रीकी मूल के लोगों पर फायरिंग, एक की मौत
HighLights
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा ये आतंकी-नस्ली हिंसा, लोगों को धर्म और त्वचा के रंग के आधार पर निशाना बनाया गया
फ्रांस में 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, हेलीकॉप्टरों और बख्तरबंद वाहनों से निगरानी
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। फ्रांस में शनिवार को देशव्यापी प्रदर्शनों से पहले शुक्रवार को राजधानी पेरिस से सटे शहर ट्रेप्स में एक बंदूकधारी ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और 12 साल की लड़की समेत चार लोग घायल हो गए। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया और मामले की जांच आंतवाद रोधी अभियोजन कार्यालय को सौंप दी गई।
आरोपित को यूरोपीय मूल का बताया गया है, जिसने अपनी कार से गोलीबारी की। उसने अफ्रीकी और उत्तर अफ्रीकी मूल के लोगों पर फायरिंग की।
रॉयटर के अनुसार, राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने घटना पर दुख जताया और इसे आतंकी व नस्ली वारदात करार दिया। उन्होंने कहा कि ये आतंकी और नस्ली हमला फ्रांस के इतिहास का 'टर्निंग प्वाइंट' है।
उन्होंने कहा कि ट्रेप्स के पीड़ितों को उनके धर्म और त्वचा के रंग की वजह से निशाना बनाया गया। उधर, फ्रांस में देशव्यापी प्रदर्शनों के आह्वान के बीच हिंसा की आशंका बढ़ गई है।
हाल के दिनों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के मद्देनजर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
हेलीकॉप्टरों से निगरानी के साथ-साथ बख्तरबंद वाहनों और वाटर कैनन की भी मदद ली जाएगी। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी
गौरतलब है कि सितंबर के आखिर में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शनों के दौरान झड़पें शुरू हो गईं। यह आंदोलन जल्द ही पूरे देश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गया, जिसके पीछे बढ़ती महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतें और सार्वजनिक क्षेत्र के बजट में कटौती जैसे कारण थे।
फ्रांस में छात्र संगठनों, सीजीटी श्रम संघ और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनों में शामिल होने की तैयारी की है।
सरकार ने दी सख्त चेतावनी एपी के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों, पीएम सेबास्तियां लेकोर्नु के साथ बैठक के बाद आंतरिक मंत्री लारेंट नुनेज ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर कट्टर वामपंथी समूहों की ओर से हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के लिए उकसाने वाले संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस को हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने कट्टर वामपंथी समूहों की ओर से कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाते हुए हमले करने के आह्वान से जुड़ी सैकड़ों ऑनलाइन काल की पहचान की है। दंगाइयों के प्रति बिल्कुल नरमी नहीं बरती जाएगी।
सुरक्षा इंतजामों के तहत पेरिस के लूवरे समेत कई संग्रहालयों को बंद रखने और प्रस्तावित कार्यक्रमों व समारोहों को रद करने का फैसला किया गया है। सार्वजनिक इमारतों, सिटी हाल और अन्य संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा के लिए पुलिस की विशेष इकाइयां भी तैनात रहेंगी।
भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
प्रेट्र के अनुसार, फ्रांस समेत यूरोप के कुछ देशों में संभावित हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने, बाहर निकलने से पहले स्थानीय हालात की जानकारी लेने और भारतीय दूतावासों के संपर्क में रहने को कहा गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, फ्रांस, इटली और बेल्जियम में भारतीय दूतावासों को सतर्क कर दिया गया है। वे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं।
