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हिंसा भड़काने में भाड़े के विदेशी सैनिकों की भूमिका संभव, शेख हसीना का बड़ा बयान

Published: Thu, 08 Jan 2026 12:03 AM (IST)

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त 2024 में अपनी सरकार के पतन में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना से ...और पढ़ें

हसीना ने सरकार गिराने में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना जताई।

हसीना ने सरकार गिराने में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना जताई।

HighLights

  1. हसीना ने सरकार गिराने में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना जताई।

  2. छात्र आंदोलन में भाड़े के सैनिकों की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया।

  3. यूनुस सरकार पर जांच रोकने और अल्पसंख्यकों पर हिंसा का आरोप।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त, 2024 में अपनी सरकार के पतन में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। उन्होंने छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने में भाड़े के सैनिकों की भूमिका की आशंका जताई।

उन्होंने बुधवार को कहा, 'मुझे नहीं पता कि यूनुस द्वारा सत्ता हथियाने में विदेशी शक्तियों का कोई हाथ था या नहीं।' हालांकि, उन्होंने आगे कहा, ''2024 के विद्रोह के कुछ पहलू अस्पष्ट हैं।'' एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा, 'कई सुझाव मिले हैं कि विद्रोह की शुरुआत में हिंसा भड़काने में उकसाने वाले तत्वों संभवत: विदेश से आए भाड़े के सैनिकों की भूमिका थी।'

उन्होंने बताया कि जुलाई 2024 में उन्होंने इन घटनाओं की जांच के लिए एक न्यायिक जांच समिति का गठन किया था। मगर, ढाका में अस्थायी रूप से सत्ता संभालने वाली मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जांच रोक दी।

हसीना ने सरकार गिराने में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना जताई

हसीना ने कहा, 'सत्ता में आते ही यूनुस ने यह जांच रोक दी..निस्संदेह इसलिए क्योंकि उन्हें पता था कि इससे मेरी सरकार को उखाड़ फेंकने की उनकी सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा। उस फैसले से ही विरोध प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनमें विदेशी हस्तक्षेप का सवाल भी शामिल है। तब से उन दिनों की घटनाओं की कोई गंभीर जांच नहीं हुई है।'

हसीना ने दावा किया कि अवामी लीग पर प्रतिबंध यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार की एक कोशिश है, जिसे पता है कि उनकी पार्टी स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव में सत्ता में वापस आ सकती है।

'चरमपंथियों को खुली छूट दे रही है अंतरिम सरकार' हसीना ने यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार चरमपंथी समूहों को खुली छूट देकर गैर-मुसलमानों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ अमानवीय अत्याचार करने की अनुमति दे रही है।

उन्होंने कहा, ''जिम्मेदारी उन लोगों की है जो वर्तमान में सत्ता में हैं और अपने सबसे बुनियादी कर्तव्य - सभी नागरिकों की समान रूप से रक्षा करने में विफल रहे हैं। अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में यह वृद्धि अचानक नहीं हुई है।

यूनुस सरकार पर जांच रोकने और अल्पसंख्यकों पर हिंसा का आरोप

यह एक गैर-निर्वाचित सरकार के कारण संभव हुआ है जिसने सांप्रदायिक हिंसा को नजरअंदाज किया है, जबकि चरमपंथी समूहों को पूरी तरह से छूट दी है।'

बेहद मजबूत है भारत एवं बांग्लादेश संबंधों की नींव' हसीना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की जनता को उनके 'समर्थन और मानवता' के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि ढाका में लोकतांत्रिक सिद्धांतों, अल्पसंख्यक संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता के महत्व को बनाए रखना नई दिल्ली का सही कदम है।

उन्होंने कहा, 'भारत बांग्लादेश का सबसे करीबी पड़ोसी और साझेदार रहा है। हमारे दोनों देश इतिहास, भूगोल, आपसी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता से जुड़े हुए हैं। भारत-बांग्लादेश संबंधों की नींव इतनी मजबूत है कि वह इस कठिन दौर को भी झेल सकती है।'

(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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