दुशान्बे(तजाकिस्तान), एएनआइ। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में सहयोग का वादा किया। बुधवार को दुशांबे में हुई यह बैठक। बैठक के विशेष विवरण के अनुसार, एससीओ देशों के एनएसए ने धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ सहयोग और हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी सहित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध में वृद्धि के जोखिमों पर चर्चा की।

इस बात पर भी जोर दिया गया कि एससीओ की क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और आधुनिक दुनिया के खतरों और चुनौतियों का मुकाबला करने में सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

बैठक में विश्वसनीय सूचना सुरक्षा सुनिश्चित करने, साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त लड़ाई और COVID-19 महामारी के संदर्भ में जैविक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों को सुनिश्चित करने में सदस्य राज्यों के बीच सहयोग पर भी चर्चा हुई। बता दें कि बैठक को ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने संबोधित किया। भारतीय एनएसए अजीत डोभाल भी बैठक के प्रतिभागियों में से एक थे।

इस बैठक में पाकिस्तानी एनएसए मोईद यूसुफ भी शामिल हुए। उन्होंने पहले कहा था कि एससीओ बैठक से इतर अपने भारतीय समकक्ष के साथ द्विपक्षीय बैठक की कोई संभावना नहीं है। पिछले साल सितंबर में, अजीत डोभाल एससीओ की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक से बाहर हो गए थे, जब पाकिस्तान ने सभा के एजेंडे का उल्लंघन करते हुए एक 'काल्पनिक' नक्शा दिखाया था। हालांकि, हाल के महीनों में, पाकिस्तानी राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व द्वारा भारत के खिलाफ बयानबाजी कुछ नरम पड़ी है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अप्रैल में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थिर संबंध कनेक्टिविटी दक्षिण और मध्य एशिया की क्षमता को अनलॉक करने की कुंजी है। फरवरी में, भारत और पाकिस्तान 2003 के युद्धविराम समझौते का कड़ाई से पालन करने पर सहमत हुए।

Edited By: Nitin Arora