मास्को, एजेंसी। रूस ने म्यांमार के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। रूस की समाचार एजेंसी आरआईए के मुताबिक, रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने म्यांपमार में जुंटा के नेता सीनियर जनरल मिन आंग हलिंग को दोनों देशों को बीच सैन्य संबंध को लेकर कहा कि हम अपने देशों के बीच स्थापित आपसी समझ, सम्मान और विश्वास के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को जारी रखने के लिए हमेशा से तैयार हैं। दरअसल, हलिंग इस सप्ताह एक सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजधानी मास्को में मौजूद थे।

दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध हाल के वर्षों में बढ़े

वहीं, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने मास्को पर म्यांमार के सैन्य जुंटा को वैध बनाने का आरोप लगाया है, जो कि द्विपक्षीय यात्राओं और हथियारों के सौदों को जारी रखते हुए बीती एक फरवरी को करीब एक दशक के बाद फिर से सत्ता में आया था। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध हाल के वर्षों में बढ़े हैं, क्योंकि मास्को ने हजारों सैनिकों को सेना प्रशिक्षण और विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति प्रदान की है। साथ ही कई पश्चिमी देशों द्वारा ब्लैकलिस्ट की गई म्यांमार की सेना को हथियार भी बेचे हैं।

मास्को के साथ मजबूत होते संबंध

मौजूदा दौर में जुंटा मदद के लिए रूस की तरफ देख रहा है। इस सप्ताह मॉस्को में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन से पहले जुंटा नेता हलिंग ने सोमवार को रूसी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख निकोलाई पेट्रोसोव से मुलाकात की। जिसके बाद परिषद के तरफ से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि, दोनों देशों ने आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और म्यांमार के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है। साथ ही दोनों देशों ने "द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। दरअसल, रूस, म्यांमार की सेना को हथियारों का प्रमुख सप्लायर है। इसी साल फरवरी में आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली सरकार का तख्तापल्ट करने और म्यांमार में सत्ता पर कब्जा करने के बाद से ये हलिंग की दूसरी मॉस्को यात्रा है।

अमेरिका ने म्यांमार पर लगाए प्रतिबंध

अमेरिका ने म्यांमार के साथ व्यापार समझौते पर विराम लगा दिया है। उसने देश पर कई आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं। मार्च के महीने में अमेरिका ने 2013 के व्यापार और निवेश फ्रेमवर्क समझौते के तहत म्यांमार के साथ हर तरह के व्यापार पर रोक लगा दी थी। इस समझौते के तहत दोनों देश व्यापार और निवेश के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ सहयोग कर रहे थे। ताकि म्यांमार को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जा सके।

 

Edited By: Amit Kumar