फ्रांस और स्पेन में विरोध-प्रदर्शन जारी, दुकानों को लूट रही नकाबपोश भीड़; पुलिस ने अब तक 1000 लोग किए गिरफ्तार
पेरिस के मध्य हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दुकानदारों ने ...और पढ़ें

फ्रांस में फिर भड़की विरोध की आग, चार लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे
HighLights
लूटपाट रोकने के लिए दुकानें बंद, संग्रहालयों पर ताले, लियोन में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस
इटली से पुर्तगाल तक सड़कों पर जनाक्रोश, यूरोप में संभावित चरमपंथी हमलों को लेकर अलर्ट
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। फ्रांस में शनिवार को एक बार फिर लाखों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। पेरिस से 120 किलोमीटर दूर स्थित ओर्लियांस से शुरू हुआ प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम को समापन के दौरान हिंसक हो उठा।
कई जगह उपद्रवियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के बाजवूद पेरिस में लगभग 1,10,000 और पूरे देश में करीब 4,10,000 प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरे।
मार्सेय, लियोन, क्लेरमोंट-फेरांड और स्ट्रासबर्ग में पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जबकि नीस और नांतेस में वाटर कैनन चलानी पड़ी। उपद्रवियों ने पुलिस पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया।
रॉयटर के अनुसार, रैली खत्म होने के बाद पेरिस में 500 से ज्यादा हुडी पहने उपद्रवियों ने रायट पुलिस पर पथराव कर दिया। मार्सेय में भी उपद्रवियों ने धातु की बड़ी-बड़ी चादरों से सड़क जाम कर दी। कूड़े के डिब्बों को सड़कों पर फैलाकर आग लगा दी और रायट पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकीं।
पुलिस के अनुसार देर शाम तक टकराव जारी रहा। उपद्रवियों ने आभूषण की दो दुकानों में घुसने का भी प्रयास किया गया। बोर्दो, लियोन और ग्रेनोबल में भी उपद्रवी भीड़ ने हिंसा का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पिछले हफ्ते के मुकाबले इस बार हिंसा की कम घटनाएं हुईं।
पेरिस के मध्य हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने लकड़ी के तख्ते लगा दिए, जबकि लूवरे, म्यूजे द'ओर्से और पेरिस ओपेरा जैसे प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान बंद रहे। मेट्रो के 20 से अधिक स्टेशन भी बंद किए गए।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, प्रदर्शन का मार्ग बदलने को लेकर विवाद भी हुआ। पुलिस ने आखिरी समय में आयोजकों को शहर के केंद्र के बजाय दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके की ओर मार्च निकालने का निर्देश दिया।
अधिकारियों का तर्क था कि पहले तय मार्ग पर दुकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा था। वामपंथी नेता जां-लुक मेलंशों ने आरोप लगाया कि इस बदलाव से प्रदर्शनकारियों को भ्रमित किया गया।
एपी के अनुसार, हिंसा और लूटपाट की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पेरिस समेत देश के प्रमुख शहरों में 70 हजार पुलिसकर्मी और रायट पुलिस तैनात किए गए। गृह मंत्री लोरां नूनेज के मुताबिक, दोपहर तक 135 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
तलाशी के दौरान पटाखे, गुलेल, धातु के छर्रे और हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली दूसरी वस्तुएं मिलीं। फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय समुदाय को सतर्क रहने की सलाह दी है।
प्रदर्शनों में छात्र, ट्रेड यूनियन, वामपंथी दल और नागरिक संगठन शामिल हुए। शुरुआत शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और बढ़ती जीवन-यापन लागत के खिलाफ हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया। येलो वेस्ट समूह ने 31 अक्टूबर को प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
यूरोप के दूसरे देशों में भी उबाल
बेल्जियम
रॉयटर के अनुसार, सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोग शनिवार को उग्र हो गए। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और काली मिर्च के पाउडर का स्प्रे किया। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ भी हुई। यहां बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर रखे स्कूटर और साइकिलों में आग लगाने और तोड़फोड़ का प्रयास किया।
इटली
प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी की सरकार ने मिलान में 500 सैनिक और पांच हजार पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। रोम में भी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। पिछले सप्ताह की हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने 45 लोगों को पकड़ा, जिनमें 34 नाबालिग बताए गए।
अल्बानिया
राजधानी तिराना में छात्र शिक्षा बजट बढ़ाने, फीस घटाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। सरकार ने अतिरिक्त बल, वाटर कैनन और आंसू गैस तैयार रखी है।
स्पेन और पुर्तगाल
अल जजीरा के अनुसार, स्पेन की राजधानी मैड्रिड में 25000 प्रदर्शनकारी सरकारी पेंशन योजना के समर्थन में सड़कों पर उतरे। स्पेन में गिरती जन्म दर और ठप वेतन बढ़ोतरी से पेंशन बोझ बढ़ता जा रहा है।
माना जा रहा है कि आम चुनाव के बाद नई सरकार पेंशन बिल में कटौती कर सकती है, जो इस साल 16 अरब डॉलर से ज्यादा होकर रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। वहीं, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी किराये पर नियंत्रण और सस्ते मकानों की मांग के साथ प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला।
चरमपंथी हमलों की आशंका से सतर्क एजेंसियां
यूरोप में जारी प्रदर्शनों के बीच संभावित चरमपंथी हमलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। एएनआई के अनुसार, स्पेन में सामने आए ऑनलाइन संदेशों में कथित तौर पर चरमपंथियों को पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर हमले के लिए उकसाया गया है।
पुर्तगाल की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली ने भी खतरे पर करीबी नजर रखने की बात कही है। हालांकि, इन संदेशों के आधार पर किसी हमले को निश्चित नहीं माना जा सकता।
