नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दुनिया भर में जैसे जैसे ट्रैवेल कारोबार बढ़ रहा है, इसके नए आयाम और माध्यम भी सामने आ रहे हैं। घूमने-फिरने के लिए हवाई यात्रा को सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे सफर में कम से कम समय लगता है और आप अपने घूमने-फिरने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय निकाल सकते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा को लेकर भी नित नई खोज हो रही हैं। इन्हीं में शामिल है Pod Plane (पॉड प्लेन), जो भविष्य में हवाई यात्रा की परिभाषा बदलने वाला है। इसकी खासियत हैरान करने वाली है, जिसके बारे में आपने संभवतः इससे पहले सुना भी नहीं होगा।

पॉड प्लेन की रफ्तार हाइपरसोनिक, मतलब आवाज से भी तेज होगी। ये पूरी तरह से बिजली से संचालित किया जा सकेगा और इसमें तीन मंजिला होगा। पॉड प्लेन फिलहाल एक कॉसेप्ट है, जिसे विकसित करने के लिए तमाम लोग काम कर रहे हैं। इससे यात्रि प्लेन और कार्गों प्लेन को मिक्स किया जा सकेगा।

स्वीटजरलैंड के फेडरल पॉलिटेक्निक संस्थान ने इस तरह के एक अद्भुत प्लेन का डिजाइन तैयार किया गया है, जिसे ‘क्लिप-एयर’ नाम दिया गया है। इसके अलावा यूरोपियन इंजीनियरिंग सर्विसेज फर्म अक्का टेक्नोलॉजिस ने भी ऐसे एक प्लेन का डिजाइन तैयार किया है, जो ‘लिंक एंड फ्लाई’ कॉसेप्ट पर आधारित है।

भविष्य और चुनौतियां
पॉड प्लेन को मूर्त रूप देने में अभी कई बाधाएं है, लेकिन क्लिप-एयर तकनीक को इसके लिए ज्यादा बेहतरीन माना जा रहा है, क्योंकि इसका डिजाइन आसान है। बीती एक शताब्दी में माल ढोने के लिए शिपिंग कंटेनर को एक उम्दा खोज मानी जाती है। इसकी वजह से माल को परिवहन के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करते हुए लाना ले जाना आसान और सस्ता हुआ है। यही वजह है कि शिपिंग कंटेनर का प्रयोग आज दुनिया भर में होता है। ऐसे में पॉड प्लेन कॉसेप्ट भविष्य में परिवहन के विभिन्न माध्यमों के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।

लिंक एंड फ्लाई कॉसेप्ट में भी परिवहन के विभिन्न माध्यमों को प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि अक्का टेक्नोलॉजीस खुद को इंटीग्रेटेड मोबिलिटी सोल्यूशन (एकीकृत परिवहन माध्यम) के तौर पर परिभाषित कर रहा है। इसके साथ ही ये मोटर वाहन (सड़क), रेलमार्ग और हवाई यात्रा के बीच का अंतर कम करने में लगा हुआ है।

ये है पॉड प्लेन का आइडिया
क्लिप-एयर और लिंक एंड फ्लाई, दोनों तरह के कॉसेप्ट में मुख्यतौर पर दो चीजों को शामिल किया गया है। इसमें कॉकपिट, इंजन और एयरफ्रेम के साथ एक पूरा हवाई जहाज है। इसके बाद इसमें कई तरह कैप्सूल्स हैं, जो इस कॉसेप्ट में पॉड की तरह जोड़े जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल माल ढोने या यात्रियों के लिए किया जा सकता है। मतलब पॉड प्लेन कई तरह के पॉड का एक कॉबिनेशन होगा। इन पॉड को जरूरत अनुरूप माल ढोने या यात्रियों के लिए आसानी से जोड़ा या हटाया जा सकता है।

दोनों कॉसेप्ट एयरक्रॉफ्ट में एलिवेटेड विंग होंगे और इंजन एकदम ऊपर लगा होगा। इससे एयरक्रॉफ्ट में पॉड केबिन जोड़ना या उन्हें हटाना आसान होगा। उदाहरण के लिए क्लिप-एयर, एक उड़ान-विंग अवधारणा पर आधारित है, जो एक छिपे हुए बम वर्षक की याद दिलाता है। कुछ दशक पहले नासा के लिए विकसित एक प्रयोगात्मक पायलटलेस विमान एक्स-48 से इसकी कुछ समानताएं मिल सकती हैं।

बहुमुखी डिजाइन
दोनों तरह के एयरक्रॉफ्ट में विंग के नीचे की तरफ धातु के लंबे पैरों की एक जोड़ी है। ये आम पहियों वाले विमान के लैडिंग मैकेनिज्म की तरह काम करते हैं। इनके सहारे विमान जमीन से एक निर्धारित ऊंचाई पर रहता है। ये ऊंचाई एयरक्रॉफ्ट के नीचे माल वाहन या यात्रियों वाले कैप्सूल को आसानी से जोड़ने की सुविधा प्रदान करते हैं। जमीन पर इन कैप्सूल को विमान से जोड़ने या अलग करने में काफी कम वक्त लगेगा। इससे एक ही एयरक्रॉफ्ट में यात्री और माल दोनों को ले जाना संभव हो सकेगा।

ये मिलेगी सुविधा
इसके जरिए यात्रियों को लंबी बोर्डिंग प्रक्रिया से निजात मिल सकती है। वह आसानी से एयरपोर्ट पर अपने निर्धारित कैप्सूल में बैठ सकते हैं, जिसे उड़ान शुरू होने से ठीक पहले विमान से अटैच किया जा सकता है। इससे बोर्डिंग की प्रक्रिया तेज होगी। ऐसे में यात्रियों को बार-बार सीट बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह एक बार बस स्टैंड से कैप्सूल में सवार होकर, रेल व हवाई माध्यम से आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। उन्हें अलग-अलग परिवहन माध्यम बदलने के लिए भागदौड़ और चेकिंग आदि की लंबी प्रक्रिया से बार-बार नहीं गुजरना पड़ेगा। इसी तरह माल वाहक शिपिंग कंटेनर को भी आसानी से एयरक्राफ्ट से ट्रक और ट्रेन पर ट्रांसफर किया जा सकता है। इस कॉसेप्ट में एक साथ अलग-अलग कंपनियां भी अलग-अलग कैप्सूल में यात्री और माल वाहक सुविधा प्रदान कर सकेंगी।

Posted By: Amit Singh