बैंकॉक, एएनआइ। आतंकी फंडिंग मामले को लेकर पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में डाले जाने का डर सताने लगा है। इससे बचने के लिए इमरान सरकार लॉबिंग में जुट गई है। खुद प्रधानमंत्री इमरान खान इस महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के दौरान कई देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे और पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाले एफएटीएफ की 13 से 18 अक्टूबर तक पेरिस में अहम बैठक होने वाली है। इसमें आतंकी फंडिंग पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों का आकलन किया जाएगा। इसमें खरा नहीं पाए जाने पर उसे काली सूची में डाला जा सकता है। अभी वह एफएटीएफ की ग्रे सूची (निगरानी) में है।

न्यूयॉर्क में 17 से 20 सितंबर तक होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र से इतर इमरान जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और कनाडा के नेताओं से मुलाकात करेंगे। एफएटीएफ मसले पर समर्थन पाने के लिए उनकी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, नार्वे, अमेरिका, मेक्सिको और अर्जेटीना के नेताओं से भी मिलने की योजना है। जबकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी कुवैत, स्वीडन, दक्षिण कोरिया, चीन, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, रूस, ग्रीस, आस्टि्रया, स्पेन, लक्जमबर्ग, आयरलैंड, ब्राजील और अन्य देशों से समर्थन मांगेंगे।

एफएटीएफ के रडार पर पाकिस्तान
पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को लेकर एफएटीएफ के रडार पर है। एफएटीएफ ने इन आतंकी संगठनों की फंडिंग और मनी लांड्रिंग पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान को 27 बिंदुओं पर काम करने को कहा था। इन बिंदुओं पर अमल में खरा नहीं पाए जाने पर उसे काली सूची में डाला जा सकता है। ऐसा होने पर खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

काली सूची में डाल चुका है एपीजी
एफएटीएफ से संबद्ध एशिया-प्रशांत समूह (एपीजी) ने हाल में पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया था। कैनबरा में 18 से 23 अगस्त तक हुई एपीजी की बैठक में पाकिस्तान के कदमों की समीक्षा की गई थी। इसमें पाकिस्तान को एपीजी के 40 मानकों में से 32 का पालन करने में विफल पाया था।

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