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पाकिस्तान ने रूस से बांग्लादेश जा रहे परमाणु ईंधन विमान का रास्ता रोका, संबंधों पर असर

Published: Tue, 29 Sep 2026 10:46 PM (IST)

पाकिस्तान ने रूस से बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए जा रहे परमाणु ईंधन ले जाने वाले विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी।

बांग्लादेश जा रहे परमाणु ईंधन वाले विमान का रास्ता रोका।

बांग्लादेश जा रहे परमाणु ईंधन वाले विमान का रास्ता रोका।

HighLights

  1. पाकिस्तान ने रूसी परमाणु ईंधन विमान को हवाई क्षेत्र नहीं दिया।

  2. रूपपुर संयंत्र के लिए पहली खेप में हुई देरी।

  3. वैकल्पिक मार्ग से आपूर्ति, परियोजना समय पर पूरी होगी।

डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए रूस से परमाणु ईंधन लेकर जा रही उड़ान को पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश में परमाणु ईंधन की पहली खेप 24 सितंबर को पहुंचने वाली थी।

बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने पुष्टि की कि पाकिस्तान ने उड़ान को हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं दी, लेकिन इसके पीछे कोई कारण नहीं बताया। विमान को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था।

रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटाम रूपपुर परियोजना का निर्माण कर रही है और बांग्लादेश को यूरेनियम की आपूर्ति की जिम्मेदार है।

बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, हवाई अड्डे पर सभी तैयारियां पूरी थीं, तभी रोसाटाम ने बताया कि उसे पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की अनुमति नहीं मिली।

रिपोर्टों के अनुसार, रोसाटाम ने अब वैकल्पिक मार्ग से आपूर्ति करने की योजना बनाई है और अगली खेप अक्टूबर में भेजी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि बाकी ईंधन दिसंबर तक सात अलग-अलग कार्गो उड़ानों से पहुंचाया जाएगा और परियोजना की समय सीमा प्रभावित नहीं होगी।

पाकिस्तान के उच्चायोग ने घटना के पीछे तकनीकी और प्रक्रियागत कारण बताया है। उसने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को देखते हुए मामले को तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

पद्मा नदी के किनारे बन रहा रूपपुर संयंत्र बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। परियोजना पहले ही कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण करीब दो वर्ष विलंबित हो चुकी है।

(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)