बर्न, एएनआइ। पाकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर के ज्यादातर नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की हिंसा से नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के आम कश्मीरी परेशान हो रहे हैं। पाकिस्तान अपनी बड़ी साजिश को कामयाब करने के लिए आतंकियों के जरिये भारत में हिंसा फैला रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पहली सालगिरह पर हिंसा फैलाने की साजिश पाकिस्तान की इसी बड़े मकसद का हिस्सा है।

गुलाम कश्मीर के नेताओं ने हालात पर जताई चिंता
 यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी के प्रमुख सरदार शौकत अली कश्मीरी के अनुसार, पाकिस्तान के छेड़े तथाकथित कश्मीरियों के लिए संघर्ष से सबसे ज्यादा नुकसान कश्मीरियों का ही हो रहा है। पाकिस्तानी सेना के कश्मीर पर कब्जे के लिए छेड़े गए ऑपरेशन जिब्राल्टर से लेकर ऑपरेशन टोपैक तक भारतीय सुरक्षाबलों ने विफल कर दिए, तब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के जरिये छद्म युद्ध छेड़ा। कश्मीर पर आयोजित वेबिनार में सरदार शौकत अली कश्मीरी ने कहा, पाकिस्तान ने 1965 में ऑपरेशन जिब्राल्टर के तहत गुरिल्ला फौज कश्मीर में भेजकर उस पर कब्जे की कोशिश की थी। भारतीय बलों ने जब उसे रोका तो युद्ध छिड़ गया, जिसमें पाकिस्तान को बुरी तरह से मात खानी पड़ी थी। इसके बाद 1988 में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन टोपैक चलाकर कश्मीर पर कब्जे की कोशिश की, लेकिन इस बार भी विफल रहा।
 
पाकिस्‍तान ने छेड़ रखा है कश्मीरी आतंकियों के जरिये छद्म युद्ध 
कश्मीरी ने कहा, आजादी के बाद पाकिस्तान के छेड़े सभी युद्ध कश्मीरी जनता के लिए नुकसानदेह साबित हुए। 1988 के बाद से पाकिस्तान ने कश्मीरी आतंकियों के जरिये छद्म युद्ध छेड़ रखा है, जिसमें बड़ी संख्या में कश्मीरी मारे जा रहे हैं और उनका माली नुकसान भी हो रहा है। पाकिस्तान का मकसद कश्मीरियों के लिए सुख-चैन-शांति नहीं, बल्कि कश्मीर की धरती पर कब्जा करना है, जिससे वह खुद को भारत के बराबर दिखा सके। वेबिनार में गुलाम कश्मीर के एक अन्य नेता नासिर अजीज खान ने कहा, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कैमरे के सामने स्वीकार किया है कि आतंकियों को प्रशिक्षण और तैयार कर सीमापार भेजा जाता रहा है। यह कश्मीर की लड़ाई जीतने के मकसद से किया जा रहा है।

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