नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और यूरोपियन संघ (EU) पहले ही पाक समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित करने के पक्ष में हैं।

इस्लामिक देशों के संगठन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी पुलवामा हमले के बाद पाक की आपत्ति के बावजूद भारत को अपने मंच पर आमंत्रित किया था। इससे नाराज पाकिस्तान ने OIC की बैठक में हिस्सा नहीं लिया और उसकी कुर्सी खाली रही।  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मंच पर न केवल पाक समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाया, बल्कि इस्लामिक देशों से इस मसले पर सहयोग का आश्वासन भी प्राप्त किया। अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान देने की घोषणा करना, पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। साथ ही ये इस बात का भी संकेत है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को इस्लामिक देशों का साथ भी नहीं मिल रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जायद मेडल से सम्मानित करने का ऐलान किया था। जायद मेडल, यूएई द्वारा राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है। खास बात ये है कि इसकी जानकारी खुद यूएई के क्राउन प्रिंस ने ट्वीट कर दी है। माना जा रहा है कि मोदी को ये सम्मान देकर यूएई दोनों देशों के बीच दोस्ती और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।

अबुधाबी के क्राउन प्रिंस और सेना के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायेद ने गुरुवार को ट्वीट कर पीएम नरेंद्र मोदी को जायद मेडल दिए जाने की घोषणा की है। शेख मोहम्मद ने ट्वीट में कहा था, ‘दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम बनाने के लिए हम अपने दोस्त भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जायेद मेडल देकर अपनी प्रशंसा व्यक्त करते हैं।’

उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायेद अल नहयन द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को जायद मेडल से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने भारत की विविधता, सहिष्णुता, सह-अस्तित्व और सम्मान की संस्कृति की भी तारीफ की थी।

मोदी ने दिया धन्यवाद
पुरस्कार की घोषणा होने के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शेख मोहम्मद बिन जायेद का शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘मैं इस पुरस्कार को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। आपके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारे रणनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं। ये दोस्ती हमारे लोगों की शांति और समृद्धि में योगदान दे रही है।’

सुषमा स्वराज ने आभार जताया
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट करके कहा, 'भारत के महान सपूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिज हाइनेस मुहम्मद बिन जायद की ओर से जायद पुरस्कार मिलने का हम सहर्ष स्वागत करते हैं।' उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी को देने से यूएई और अन्य इस्लामिक विश्व के साथ अब तक के सबसे बेहतरीन रिश्ते बनाने में उनके प्रयासों को मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि वह भारतवासियों की ओर से यूएई के राष्ट्रपति और हिज हाइनेस का आभार व्यक्त करती हूं।

मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय
पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हैं। इससे पहले यह सम्मान एलिजाबेथ, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, व्लादिमीर पुतिन, निकोलस सरकोजी, शी चिनफिंग और एंजेला मार्केल को मिल चुका है। यूएई का यह अहम सम्मान ज्यादातर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (पी-5) और जर्मनी के राष्ट्राध्यक्षों को मिला है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का नाम अब इस अहम लीग में शुमार हो गया है। यह सम्मान दोनों देशों के रिश्तों में आई मजबूती और विश्वास को दर्शाता है। इससे पहले फरवरी में पीएम मोदी को सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिवों कोफी अन्नान और बान की मून को भी मिल चुका है।

ओआइसी में भी अलग-थलग पड़ा पाक
मालूम हो कि पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद भी मुश्लिम देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को आमंत्रित किया था। सुषमा स्वराज ने संगठन के मंच पर पुलवामा हमले पर पाकिस्तान को घेरा था। पाकिस्तान ने भारत को इस्लामिक सहयोग संगठन में आमंत्रित करने पर आपत्ति व्यक्त की थी। बावजूद OIC ने अपना फैसला नहीं बदला तो चिढ़ की वजह से पाकिस्तान ने कार्यक्रम में हिस्सा ही नहीं लिया था।

सऊदी क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा
OIC ही नहीं, पुलवामा आतंकी हमले के ठीक बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी पहले पाकिस्तान और फिर भारत का दौरा किया था। उस वक्त भी भारत और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच पुलवामा आतंकी हमले और पाक समर्थित आतंकवाद को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद सऊदी अरब ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की बता कही थी। ऐसे में अब एक और इस्लामिक देश यूएई द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने से पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। इससे साफ है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की कूटनीति काम आ रही है। पाकिस्तान पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ा हुआ है। अब उसे इस्लामिक देशों का भी साथ नहीं मिल रहा है।

मोदी को इस साल मिले दो बड़े सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्रो मोदी को इस साल दो बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। फरवरी 2019 में दक्षिण कोरिया के सियोल में उन्हें शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नरेंद्र मोदी ये पुरस्कार पाने वाले 14वें व्यक्ति हैं। मोदी ने पुरस्कार में मिली 1.30 करोड़ रुपये की राशि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए दान कर दी थी। पर्यावरण के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए भी मोदी को इसी साल संयुक्त राष्ट्र का चैंपियन ऑफ द अर्थ अवार्ड दिया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री को ये सम्मान दिया था।

यूएई ने जैश के सदस्य को सौंपा था
यूएई ने हाल में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के प्रमुख सदस्य निसार अहमद को भारत को सौंप दिया था। इस आतंकवादी पर 30 दिसंबर 2017 की रात में जम्मू-कश्मीर के लेथपोरा स्थिति सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला कराने का आरोप है। निसार इस हमले का मास्टर माइंड था। इस आतंकी हमले में पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे और जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकी मारे गए थे। यूएई ने उसी वक्त साफ कर दिया था कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसका रुख पाकिस्तान से अलग है। मालूम हो कि पाकिस्तान हमेशा से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां संचालित करने वाले जैश-ए-मुहम्मद समेत अन्य संगठनों को बचाने में जुटा रहता है।

क्रिश्चियन मिशेल समेत इन आतंकियों को भी सौंपा
यूएई ने कुछ समय पहले अगस्टा वेस्टलैंड डील में रिश्वतखोरी के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को भी भारत को सौंपा था। इसी मामले में एक अन्य आरोपी दीपक तलवार को भी यूएई भारत को सौंप चुका है। इससे पहले यूएई, सीरियाई आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के आतंकियों, इंडियन मुजाहिदीन के अब्दुल वाहिद सिद्दिबापा और 1993 मुंबई बम धमाकों के आरोपी फारूख टकला जैसे आतंकवादियों को भी भारत के सुपुर्द कर चुका है। मालूम हो कि पिछले कुछ समय में भारत और यूएई के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने आपसी सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किये हैं।

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