बेरुत/पेरिस/वाशिंगटन, एजेंसियां। कुर्द लड़ाकों के नियंत्रण वाले पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की की सेनाओं ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया है कि तुर्की की सैन्य कार्रवाई में एक महिला नेता समेत कम से कम नौ सीरियाई नागरिकों की मौत हो गई है। इस बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने सीरिया में अत्याचार का सामना कर रहे लोगों की मदद के लिए पांच करोड़ डॉलर की रकम जारी की है।

इस बीच, सीरिया में कुर्द लड़ाकों के खिलाफ तुर्की के हमले के मसले पर फ्रांस और जर्मनी ने कड़ी कार्रवाई की है। दोनों ही देशों ने तुर्की को किए जाने वाले हथियारों के निर्यात पर रोक लगा दी है। बयान में कहा गया है कि यह रोक इस आशंका के मद्देनजर लगाई गई है क्‍योंकि इन हथियारों का इस्‍तेमाल सीरिया पर किए जा रहे हमलों में हो सकता था। फिनलैंड, नॉर्वे और नीदरलैंड काफी पहले ही तुर्की को हथियार के निर्यात पर रोक लगा चुके हैं।

बता दें कि जर्मनी तुर्की का मुख्य हथियार आपूर्तिकर्ता है। तुर्की ने अपने हमलों में 342 कुर्द चरमपंथियों को मारे जाने का दावा किया है। वहीं हालात पर नजर रखने वाली सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, इस लड़ाई में अब तक कम से कम 38 आम लोग मारे जा चुके हैं।

इसके साथ ही यूरोप के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां आयोजित करके तुर्की के कदम की निंदा की है। यही नहीं कई देशों ने भी तुर्की के हमले की निंदा की है। भारत ने तुर्की के कदम को गलत ठहराया है तो दूसरी तरफ पाकिस्‍तान ने उसकी सैन्‍य कार्रवाई का समर्थन किया है।

समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की की सेना ने सीरिया के सीमांत कस्बे पर कब्जा जमा लिया है। सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसने कुर्द लड़ाकों के खिलाफ लड़ाई के चौथे दिन रास अल-अयन कस्बे के केंद्र पर कब्‍जा जमा लिया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने सीरिया से सेना हटाने की घोषणा की थी, जिसके बाद तुर्की ने कुर्द लड़ाकों पर हमले शुरू कर दिए हैं।

एपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की के हमले की वजह से सीरिया के सीमांत क्षेत्रों से अब तक 130,000 लोगों को अपना घरबार छोड़कर पलायन करना पड़ा है। जानकारों का मानना है कि तुर्की की इस कार्रवाई से सीरिया में फिर से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के हावी होने का मौका मिल सकता है। कल यानी सोमवार को यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक है जिसमें तुर्की पर यूरोपियन यूनियन कोई फैसला ले सकता है। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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