नेपाल में युवा क्रांति: बाढ़ की तबाही के बाद भड़की 'जेन जी' पीढ़ी, दुनिया के प्रदूषक देशों के खिलाफ खोला मोर्चा
नेपाल की जेन जी पीढ़ी ने दुनियाभर में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक देशों के खिलाफ आवाज बुलंद की ...और पढ़ें

प्रदूषण फैलाने वाले देशों के खिलाफ आवाज उठा रही नेपाल की जेन जी पीढ़ी (फोटो- रॉयटर)
HighLights
प्रदूषण फैलाने वाले देशों के खिलाफ आवाज उठा रही नेपाल की जेन जी पीढ़ी
नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से तबाही के बाद आक्रोशित युवाओं की मांग
सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देश नेपाल को हुए नुकसान के लिए दें मुआवजा
न्यूयॉर्क टाइम्स, काठमांडू। नेपाल की जेन जी पीढ़ी ने दुनियाभर में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक देशों के खिलाफ आवाज बुलंद की है और 'क्लाइमेट जस्टिस' या जलवायु न्याय की मांग की है। पिछले महीने नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद युवा आक्रोशित हैं। गौरतलब है कि 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को जेनजी कहा जाता है।
नेपाल की 26 वर्षीय ल्हाजोम और जेन जी पीढ़ी के अन्य युवाओं ने मांग की है कि दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले देश नेपाल को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दें। ल्हाजोम ने इस तबाही को "जलवायु से संबंधित राष्ट्रीय आपातकाल" करार दिया।
उन्होंने कहा, समय आ गया है कि हम विदेश से मदद मांगने के बजाय जलवायु मुआवजे के लिए आवाज उठाएं, क्योंकि दूसरे देशों के अपराधों की सजा हम भुगत रहे हैं। यानी जलवायु परिवर्तन या प्रकृति को नुकसान अमीर देश पहुंचा रहे हैं जबकि भुगतना नेपाल को पड़ रहा है।
कुछ दिनों के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। वह मांग करेंगे कि विकसित देश कम विकसित देशों को हुए नुकसान का खर्च उठाएं जो जलवायु-संबंधी आपदाओं से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ग्रेटा थनबर्ग के साथ संपर्क में है, जिन्होंने जलवायु मुआवजे के लिए नेपाल की कोशिशों का समर्थन करते हुए वीडियो बनाया था।
