जिनेवा, रायटर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक तकनीकी निकाय ने कहा है कि ओमिक्रोन से मुकाबला करने के लिए वर्तमान कोरोना वैक्सीन पर फिर से काम करने की आवश्यकता हो सकती है ताकि वे इसके खिलाफ प्रभावी हो सकें। स्वतंत्र विशेषज्ञों वाले इस तकनीकी समूह ने कहा है कि वे ओमिक्रोन के मद्देनजर टीकाकरण संरचना में बदलाव पर विचार करेंगे और जोर देंगे टीके ज्यादा प्रभावी हो सकें।

मौजूदा टीकों को बदलने की आवश्यकता

डब्ल्यूएचओ को तकनीकी सलाह देने के लिए गठित इस निकाय का मानना है कि वर्तमान कोरोना टीकों की संरचना बदलने की आवश्यकता हो सकती है ताकि वे ओमिक्रोन समेत कोरोना के अन्य चिंता के प्रकारों (वीओसी) से सुरक्षा प्रदान कर सकें। निकाय ने कहा कि एक बेहतर बूस्टर डोज के लिए जरूरी है कि वह वैध, व्यापक, प्रभावी और लंबे समय तक कारगर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देने वाली हो। यह वैक्सीन ऐसी होनी चाहिए जिससे बार-बार बूस्टर डोज के की जरूरत न महसूस हो।

वैक्सीन को लेकर और शोध की जरूरत

हालांकि इस निकाय ने अपने बयान में ओमिक्रोन के लिए किसी खास वैक्सीन की वकालत न करते हुए कहा कि इसे क्षेत्र में अभी और शोध की जरूरत है। उसने वैक्सीन विनिर्माताओं से और अधिक डाटा साझा करने का आग्रह किया है। बयान में कहा गया कि एक अपडेट टीका किसी खास वैरिएंट को लक्षित कर तैयार किया जा सकता है या ऐसा टीका भी तैयार किया जा सकता है जो एक साथ कई प्रमुख वौरिएंट का सामना करने में सक्षम हो। वैसे इस संबंध में तभी कोई सिफारिश की जाएगी जब और डाटा उपलब्ध होगा। वैसे कुछ वैक्सीन निर्माता पहले से ही अगली पीढ़ी के टीके का विकास कर रहे हैं।

मार्च में आएगी नई वैक्सीन

सोमवार को फाइजर के मुख्य कार्यकारी अल्बर्ट बौर्ला ने कहा कि ओमिक्रोन को ध्यान में रखते हुए कोरोना वैक्सीन फिर से डिजाइन की गई है। यह वैक्सीन मार्च तक लांच हो सकती है। फाइजर की प्रतिद्वंद्वी माडर्ना भी ओमिक्रोन को ध्यान में रख वैक्सीन को विकसित करने में जुटी है, लेकिन इसे सामने आने में कम से कम दो महीने लग सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के एक शीर्ष अधिकारी ने पहले कहा था कि वैक्सीन की संरचना के मुद्दे पर वैश्विक समन्वय की आवश्यकता है। इस पर फैसला लेने के काम सिर्फ विनिर्माताओं पर नहीं छोड़ा जा सकता।

Edited By: Amit Singh