ह्यूस्टन, प्रेट्र। प्राचीन समय में मनुष्य आखेट के लिए पत्थरों से बने हथियारों के साथ-साथ समुद्री सीपों की मदद से बनाए गए औजारों का प्रयोग भी करते थे। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने निएंडरथल (प्राचीन मनुष्यों की एक प्रजाति) के निवास स्थलों पर मिली सीपों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है। इसमें बताया गया है कि इन हथियारों को तैयार करने के लिए निएंडरथल न सिर्फ समुद्री किनारों पर पड़ी सीप का प्रयोग करते थे, बल्कि महासागरों की तलहटी में गोता भी लगाते थे।

अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इटैलियन गुफा में मिले 170 से अधिक सीप के उपकरणों का आकलन किया। वैज्ञानिकों ने इन सीपों के घर्षण के आधार पर निएंडरथल द्वारा समुद्र के किनारे वाले और पानी के अंदर से इकट्ठा किए गए सीप में साफ तौर पर अंतर देखा। इन उपकरणों का बारीकी से अध्ययन के बाद उन्होंने पाया कि लगभग तीन-चौथाई सीप अपारदर्शी थे। साथ ही, थोड़े बाहर की तरफ उभरे हुए थे, जैसे कि वर्षों तक रेत से इस पर पॉलिश की गई हो। यह बतलाता है कि इन्हें रेतीले समुद्री तट पर धोया गया था।

अध्ययन में बताया गया है कि बाकी के सीप चमकदार और बाहर से बिल्कुल चिकने थे। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मुमकिन है कि इन सीपों को जीवित जानवरों के रूप में सीधे समुद्र की सतह से उठाकर लाया गया हो। कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक पाओला विल्ला ने बताया, ‘यह संभव है कि निएंडरथल समुद्र के दो से चार मीटर नीचे तक सीप इकट्ठा करने में सक्षम थे। बेशक उनके पास स्कूबा वाले उपकरण नहीं थे।’

90 हजार वर्ष पुराने औजार

पीएलओएस जर्नल में प्रकाशि अध्ययन में कहा गया है कि इटली के पश्चिमी तट पर स्थित ग्रोटा डे मॉस्करीनी नामक गुफा, जिसे 1930 के दशक के आखिर में खोजा गया। पुरातत्ववेत्ताओं ने 1949 में इस जगह पर दर्जनों समुद्री सीप खोजे। बाद में शोध से पता चला कि गुफा निएंडरथल का निवास स्थल थी और इन्होंने ही कई सीपों को पतले काटने वाले हथियारों के रूप में विकसित किया, जो लगभग 90 हजार वर्ष पुराने हैं।

समुद्र से करीबी संबंध

अध्ययन में बताया गया है कि मॉस्करीनी से 23.9 फीसद नमूने प्रत्यक्ष तौर पर निएंडरथल द्वारा समुद्र की सतह से जीवित जानवरों के रूप में इकट्ठा किए गए थे। विल्ला का कहना है कि वैज्ञानिक जितना मानते हैं, उससे कहीं अधिक इंसानों की इस प्रजाति का समुद्र से करीबी संबंध था। मौजूदा अध्ययन के निष्कर्ष के इस दावे को मजबूत करता है कि कुछ निएंडरथल कळ्शल तैराक भी होंगे, इसीलिए वे बिना किसी उपकरण के पानी में उतर जाते थे।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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