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मिरर इमेज की यह गुत्थी कैसे सुलझी? एक खोज कैसे बन गई बेहद क्रांतिकारी; हेनरी केगन और केंसो सोई की कहानी

Published: Wed, 07 Oct 2026 09:17 PM (IST)

फ्रांस के हेनरी केगन और जापान के केंसो सोई को अणुओं में मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने ...और पढ़ें

हेनरी केगन और केंसो सोई को केमिस्ट्री नोबेल।

हेनरी केगन और केंसो सोई को केमिस्ट्री नोबेल।

HighLights

  1. हेनरी केगन और केंसो सोई को केमिस्ट्री नोबेल।

  2. अणुओं में मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई।

  3. जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण में क्रांतिकारी खोज।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अणुओं में मिरर इमेज की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने के लिए फ्रांस के हेनरी केगन और जापान के केंसो सोई को इस साल के लिए केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। रायल स्वीडिश एकेडमी आफ साइंसेज ने कहा कि दवाओं के निर्माण के लिए रासायनिक प्रतिक्रया कराने में यह खोज महत्वपूर्ण है।

इससे न सिर्फ दवाओं का निर्माण आसान होगा, बल्कि कई तरह के अन्य रसायन बनाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हेनरी केगन और केंसो सोई का काम महान फ्रांसीसी विज्ञानी लुई पाश्चर की खोज पर आधारित है। 1.20 करोड़ स्वीडिश क्राउन (12 लाख डालर) की पुरस्कार राशि दोनों विज्ञानियों में बराबर बांटी जाएगी।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, हेनरी केगन पेरिस विश्वविद्यालय से और केंसो सोई टोक्यो यूनिवर्सिटी आफ साइंस से जुड़े हुए हैं। नोबेल समिति ने इन दोनों पुरस्कार विजेताओं को एक ऐसे रहस्य को सुलझाने का श्रेय दिया, जिसने लंबे समय से विज्ञानियों को हैरान कर रखा था।

रसायन विज्ञान के लिए नोबेल समिति के अध्यक्ष हेनर लिंके ने कहा कि इन विज्ञानियों ने एक शताब्दी से भी ज्यादा पुरानी रासायनिक गुत्थी का समाधान प्रदान किया है। उन्होंने जिस रासायनिक प्रतिक्रिया का विकास किया है, वह अद्भुत है।

रायटर के अनुसार, पुरस्कार की जानकारी मिलने पर केंसो सोई ने कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे रोमांचक दिन है। मैं प्रोफेसर हेनरी केगन के साथ इस पुरस्कार को साझा कर बहुत खुश हूं। उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें यह समाचार मिला तब वह खरीदारी कर रहे थे। नोबेल समिति केगन से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी, ताकि उन्हें पुरस्कार की जानकारी दी जा सके।

मिरर इमेज की यह थी गुत्थी

प्रकृति और जीवन में मौजूद कई महत्वपूर्ण अणु (जैसे अमीनो एसिड और शुगर) दो रूपों में पाए जाते हैं। ये बिल्कुल हमारे बाएं और दाहिने हाथ की तरह एक-दूसरे की मिरर इमेज जैसे होते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे होमो-काइरैलिटी कहा जाता है।

धरती पर मौजूद सभी जीवित प्राणी आमतौर पर अपने एक ही तरफ के अणुओं का उपयोग करते हैं। प्रयोगशाला में जब इन अणुओं को बनाया जाता था, तो दोनों रूपों का बराबर मिश्रण बनता था। यह घटना 100 साल से विज्ञानियों के लिए पहेली बनी हुई थी। हेनरी केगन और केंसो सोई ने दिखाया कि रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिये सिंगल मालेकुलर मिरर इमेज कैसे बनाया जा सकता है?

इस खोज का यह है महत्व

जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण में इस खोज को बेहद क्रांतिकारी माना जा रहा है। दरअसल, कई बार कोई दवा एक मिरर इमेज के जरिये बीमारी को ठीक करती है, जबकि दूसरी मिरर इमेज या तो निष्क्रिय होती है या शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि दवा एक इमेज पर एक तरह का प्रभाव डाल सकती है और दूसरी इमेज पर अलग प्रभाव डाल सकती है। हेनरी केगन और केंसो सोई की खोज की बदौलत आज दवा निर्माता कंपनियां दवा का केवल वही वर्जन बना रही हैं, जो इलाज के लिए जरूरी है। इससे आधुनिक जीवनरक्षक दवाएं सुरक्षित रूप से बनाई जा रही हैं।