म्यांमार, एजेंसी। म्यांमार के सैन्य शासन जुंटा ने बुधवार को दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समूह आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) के क्षेत्रीय सभाओं से अपने प्रतिनिधियों को बाहर करने को लेकर फटकार लगाई और इस फैसले को बाहरी दबाव से प्रभावित बताया। साथ ही आसियान पर उनके देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।

जुंटा ने आसियान को दिया दो टूक जवाब 

जुंटा के प्रवक्ता जॉ मिन टुन ने एक समाचार सम्मेलन में कहा कि अगर आसियान समिट में किसी देश का प्रतिनिधित्व करने वाली सीट खाली है, तो उसे आसियान शिखर सम्मेलन नहीं कहा जाना चाहिए। जुंटा प्रवक्ता ने कहा कि म्यांमार शांति योजना को लागू करने पर काम कर रहा है। मगर वे चाहते हैं कि हम सेना के खिलाफ हथियार उठाने वाले आतंकवादियों से मिलें और उनसे बात करें।

वहीं, एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस के सदस्यों ने म्यांमार पर शांति योजना पर ठोस प्रगति करने में विफल होने का आरोप लगाया है। आसियान का आरोप है कि म्यांमार के सैन्य शासन जुंटा ने विरोधियों के साथ न उलझने और शत्रुता की समाप्ति को लेकर वादा किया था, जिसे पूरा करने में वह असफल रहा।

आंग सान सू की को कैद करने पर हुई आलोचना

हाल ही में, राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निष्पादित करने और म्यांमार के विपक्ष और लोकतंत्र आंदोलन की प्रतीक आंग सान सू की को कैद करने के लिए म्यांमार की सैन्य शासन जुंटा की हर तरफ आलोचना हुई। यही कारण है कि आसियान ने म्यांमार के जनरलों को क्षेत्रीय बैठकों में भाग लेने से रोक दिया। आसियान के सदस्यों ने पिछले माह साफ तौर पर कहा कि जब तक सैन्य शासन जुंटा शांति योजना पर प्रगति का प्रदर्शन नहीं करता, तब तक म्यांमार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जाएगा।

क्या है आसियान

आसियान दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का एक संगठन है। इसके 11 सदस्य देश हैं, जिसमें ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, तिमोर-लेस्ते, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल है। आसियान का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रखते हुए आपस में आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देना है।

Edited By: Aditi Choudhary