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कुआलालंपुर, रायटर। मलेशिया सरकार ने कहा है कि देश में फांसी की सजा बरकरार रखी जाएगी। हालांकि गंभीर अपराधों के लिए मौत की सजा की अनिवार्यता खत्म की गई है। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के उप मंत्री मुहम्मद हनीपा मैदीन ने कहा कि मौत की सजा बरकरार रहेगी, लेकिन यह तय करने का अधिकार अदालत के पास होगा कि गंभीर अपराध के दोषी को फांसी दी जाए या नहीं। यह घोषणा सरकार की पिछली योजना से इतर है। पिछले साल अक्टूबर में मलेशिया के कानून मंत्री ल्यू वुई केओंग ने कहा था कि मंत्रिमंडल ने फांसी की सजा को खत्म करने का फैसला लिया है।

सरकार द्वारा मौत की सजा को पूरी तरह खत्म नहीं करने के फैसले से भगोड़े पुलिसकर्मी सिरुल अजहर उमर के मामले पर फर्क पड़ सकता है। 2006 में एक हाई प्रोफाइल हत्या के मामले में अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने के ठीक पहले सिरुल ऑस्ट्रेलिया फरार हो गया था। वह नजीब रजाक का निजी सुरक्षाकर्मी था, जो उस समय उप प्रधानमंत्री थे। सिरुल पर मंगोलियाई मॉडल अल्तानतुया शारिबू की हत्या का आरोप है।

2009 में नजीब रजाक के प्रधानमंत्री बनने के बाद से यह मामला दब गया था। पिछले साल रजाक के सत्ता से बाहर होने के बाद पुलिसकर्मियों ने फिर इसकी जांच तेज की है। आशंका है कि मॉडल की हत्या का आदेश खुद नजीब रजाक ने दिया था। ऑस्ट्रेलिया की प्रत्यर्पण नीति के तहत सिरुल को तभी मलेशिया प्रत्यर्पित किया जाएगा, अगर उसे मौत की सजा नहीं दी जाए। महातिर मुहम्मद की अगुआई वाली नई सरकार ने कहा है कि सिरुल के प्रत्यर्पण के लिए उसकी मौत की सजा निरस्त की जा सकती है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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