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यूक्रेन युद्ध से पोलैंड ने लिया बड़ा सबक: स्टारलिंक की तर्ज पर बनाएगा खुद का सैटेलाइट नेटवर्क, जानें भारत की क्या है तैयारी?

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:33 AM (IST)Updated: Sat, 12 Sep 2026 07:21 AM (IST)

यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए पोलैंड अपना सैन्य सैटेलाइट संचार सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा ...और पढ़ें

यूक्रेन युद्ध से सबक: पोलैंड चाहता है अपना स्टारलिंक, भारत कहां खड़ा है

यूक्रेन युद्ध से सबक: पोलैंड चाहता है अपना स्टारलिंक, भारत कहां खड़ा है

HighLights

  1. यूक्रेन युद्ध ने सैटेलाइट संचार के सैन्य महत्व को साबित किया है

  2. भारत के पास एक दशक से अधिक समय से समर्पित सैन्य सैटेलाइट संचार क्षमताएं हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए पोलैंड अपना सैन्य सैटेलाइट संचार सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पोलिश प्रधानमंत्री डोनल्ड टस्क ने इसे संभावित पोलिश स्टारलिंक बताया है।

पोलैंड फिनिश कंपनी आईसीईवाईई और राज्य नियंत्रित रक्षा दिग्गज पीजीजेड के साथ साझेदारी कर रहा है। दोनों कंपनियों ने 9 सितंबर को कील्स में आयोजित एमएसपीओ डिफेंस शो में लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए।

आईसीईवाईई तकनीक भागीदार के रूप में सैटेलाइट आर्किटेक्चर विकसित करेगी, उपग्रह बनाएगी और संचालन करेगी, जबकि पीजीजेड घरेलू औद्योगिक आधार तैयार करेगा।

यह कार्यक्रम 2026 से 2030 के बीच लागू होने की योजना है। सिस्टम वितरित सैटेलाइट आर्किटेक्चर पर आधारित होगा और पोलैंड इसे स्वतंत्र रूप से विकसित व संचालित कर सकेगा। टस्क ने कहा कि जो कोई भी रूसी-यूक्रेनी युद्ध को करीब से देख रहा है, वह जानता है कि संचार कितना महत्वपूर्ण है। आधुनिक युद्धक्षेत्र पर संचार बिल्कुल निर्णायक है।

यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक की भूमिका

यूक्रेन युद्ध ने सैटेलाइट संचार के सैन्य महत्व को साबित किया है। यूक्रेनी सेना हजारों स्टारलिंक टर्मिनलों पर निर्भर थी, जो युद्धक्षेत्र संचार और कुछ ड्रोन ऑपरेशनों के लिए इस्तेमाल होते थे। ये सिस्टम जासूसी और सिग्नल जैमिंग के प्रति अपेक्षाकृत प्रतिरोधी साबित हुए।

हालांकि, निजी सिस्टम पर निर्भरता के जोखिम भी सामने आए। जुलाई 2025 में स्टारलिंक की वैश्विक आउटेज ने करीब ढाई घंटे तक यूक्रेनी सैन्य संचार बाधित किया, जिससे ड्रोन ऑपरेशन और युद्धक्षेत्र समन्वय प्रभावित हुआ। यूरोपीय देश अब अमेरिकी सैटेलाइट संचार अवसंरचना पर निर्भरता कम करने की दिशा में सोच रहे हैं।

भारत कहां खड़ा है?

भारत के पास एक दशक से अधिक समय से समर्पित सैन्य सैटेलाइट संचार क्षमताएं हैं। भारतीय नौसेना को 2013 में जीसैट-7 मिला था। वायुसेना को 2018 में जीसैट-7ए मिला, जो भारतीय क्षेत्र पर संचार क्षमता प्रदान करता है।

नवंबर 2, 2025 को लॉन्च किया गया सीएमएस-03 (जीसैट-7आर) नौसेना के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। सरकार इसे नौसेना का सबसे उन्नत संचार उपग्रह बताती है, जो अंतरिक्ष आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करता है।

करीब 4,400 किलोग्राम वजन वाला यह भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह है, जो भारतीय मिट्टी से लॉन्च किया गया। यह भारतीय महासागर क्षेत्र में व्यापक कवरेज प्रदान करता है।