विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

साल 2100 तक खत्म हो जाएगी मानव आबादी? AI, परमाणु युद्ध और बायो-वेपन पर रिसर्च में बड़ा खुलासा

Published: Sun, 11 Oct 2026 08:30 PM (GMT+05:30)

'द लैंसेट' की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि परमाणु युद्ध, AI का गलत इस्तेमाल और जैविक हथियार 2100 तक मानवता के अस्तित्व को समाप्त कर सकते हैं।

परमाणु युद्ध और बायो-वेपन मानवता के लिए खतरा (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

परमाणु युद्ध और बायो-वेपन मानवता के लिए खतरा (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

HighLights

  1. लैंसेट रिपोर्ट: 2100 तक मानवता के लिए 17 बड़े खतरे।

  2. परमाणु युद्ध, AI दुरुपयोग, जैविक हथियार अस्तित्व का बड़ा खतरा।

  3. जलवायु परिवर्तन, AI misuse पर तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता।

डिजिटल डेस्क, बर्लिन। मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि परमाणु युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का गलत इस्तेमाल और जैविक हथियार (बायो-वेपन) वर्ष 2100 तक मानवता के अस्तित्व को समाप्त कर सकते हैं।

दरअसल, लैंसेट कमीशन ऑन 21st सेंचुरी ग्लोबल थ्रेट्स टू हेल्थ' द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में अगले 75 वर्षों में इंसानी सेहत और अस्तित्व को नुकसान पहुंचाने वाले 17 बड़े खतरों की पहचान की गई है। इनमें परमाणु युद्ध, AI का गलत इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, बच्चों में कुपोषण, मोटापा और अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती शामिल हैं।

हालांकि, ऐसा होने की संभावना कम है, फिर भी इससे बचने के लिए विशेषज्ञों ने आगाह करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, महामारियों और AI के बेलगाम इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाले खतरों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

जानकारों का कहना है कि सरकारें अभी भी इन खतरों को कम करने और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकती हैं।

वर्ल्ड हेल्थ समिट में पेश किया जाएगा रिपोर्ट

35 विशेषज्ञों के दल द्वारा तैयार 'लैंसेट कमीशन ऑन 21st सेंचुरी ग्लोबल थ्रेट्स टू हेल्थ' की रिपोर्ट, जिसे जर्मनी के बर्लिन में आयोजित होने वाले वर्ल्ड हेल्थ समिट में पेश किया जाएगा, इसमें चेतावनी दी गई है कि AI का दुरुपयोग (जैविक हथियारों सहित) और परमाणु युद्ध (जिससे परमाणु अकाल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है) अगले 75 वर्षों में मानवता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये वैश्विक चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं और इनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि विश्वभर की सरकारें समय रहते कड़े और ठोस कदम उठाएं, तो आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इन संभावित खतरों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

AI के गलत इस्तेमाल से बढ़ेगा खतरा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI का गलत इस्तेमाल करके ऐसे बायोलॉजिकल हथियार बनाए जा सकते हैं, जिनसे नुकसान हो सकता है। ऐसे हथियार लाखों लोगों की जान खतरे में डाल सकते हैं और बहुत गंभीर स्थिति में इंसानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं।

कमीशन के को-चेयर प्रोफेसर क्रिस्टोफर मरे के अनुसार, आज के नेताओं द्वारा लिए गए फैसले ही भविष्य की पीढ़ी का स्वास्थ्य और भलाई तय करेंगे। सरकारों को इन चुनौतियों को भांपने और इनसे निपटने के लिए तुरंत बजट व संसाधनों का आवंटन करना चाहिए।

  • मानवता के अस्तित्व पर संकट- अगले 75 वर्षों (2100 तक) में AI के गलत इस्तेमाल (जैसे बायो-वेपन का निर्माण) और परमाणु युद्ध से इंसानियत के पूरी तरह खत्म होने का खतरा है।
  • परमाणु अकाल- परमाणु युद्ध से वायुमंडल में हानिकारक कण फैलने के कारण सूरज की रोशनी रुक सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजों का संकट खड़ा होगा और बड़े पैमाने पर भुखमरी या अकाल की स्थिति पैदा हो सकती है।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव- यदि ग्लोबल वॉर्मिंग (वैश्विक तापमान) को 4.4 डिग्री सेल्सियस की जगह 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जाए, तो इससे इंसानों के 1.89 अरब 'स्वस्थ जीवन-वर्षों' को बचाया जा सकता है।
  • मदद रुकने से बड़ा नुकसान- अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मदद में भारी कटौती होने से 2100 तक करीब 1.5 अरब 'स्वस्थ जीवन-वर्षों' का नुकसान हो सकता है, जिसका सबसे बुरा असर (करीब 70%) सब-सहारा अफ्रीका पर पड़ेगा।
  • अमीरी-गरीबी का अंतर- अधिक आय वाले क्षेत्रों में मोटापा और खराब मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चिंताएं हैं, जबकि कम आय वाले क्षेत्रों में कम शिक्षा और बच्चों में कुपोषण मुख्य समस्याएं हैं।

परमाणु युद्ध से पैदा हो सकता है 'परमाणु सूखा'

परमाणु युद्ध का असर केवल विस्फोट और जनहानि तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उठने वाले धुएं और कणों के ऊपरी वायुमंडल में पहुंचने से सूर्य की रोशनी धरती तक कम पहुंच सकती है। इससे तापमान गिरने, फसलों के उत्पादन में भारी कमी आने और वैश्विक खाद्य संकट पैदा होने का खतरा है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बड़े पैमाने पर भुखमरी और मानव जीवन के लिए गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

खतरों से निपटने के लिए साझा प्रयास जरूरी

कमीशन में शामिल 35 विशेषज्ञों ने रिपोर्ट तैयार की है। इसमें पारंपरिक युद्ध, अत्यधिक शराब सेवन, उच्च रक्तचाप, आय असमानता, शिक्षा का निम्न स्तर, खराब मानसिक स्वास्थ्य, धूम्रपान और अस्वस्थ बुढ़ापे को भी प्रमुख चुनौतियों में गिना गया है।

कमीशन के सह-अध्यक्ष और वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फार हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के निदेशक प्रोफेसर क्रिस्टोफर मरे के मुताबिक, आज लिए जाने वाले फैसले आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और खुशहाली को तय करेंगे। उन्होंने सरकारों से इन खतरों की पहचान, रोकथाम और उनसे निपटने की तैयारी के लिए पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया।