कोरिया बार्डर [जय प्रकाश रंजन] । उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग उन कहते हैं कि अब पूरा अमेरिका उनकी जद में आ चुका है। किम के इस बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संवेदनशील टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वो इस तरह के गैर जिम्मेदार बयानों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। लेकिन उत्तर कोरिया को किसी तरह की हिमाकत से बचना चाहिये। जब उत्तर कोरिया ने हॉसॉन्ग-15 मिसाइल का परीक्षण किया तो दक्षिण कोरिया ने छोटी दूरी की तीन मिसाइलों को दाग कर ये बता दिया कि वो कमजोर नहीं है। उत्तर कोरिया के गैरजिम्मेदाराना रवैये की पूरी दुनिया आलोचना कर रही है। इन सबके बीच हमारे विशेष संवाददाता जय प्रकाश रंजन दक्षिण कोरिया की यात्रा पर हैं। उन्होंने करीब से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया सीमा के करीब जाकर उत्तर कोरिया की गतिविधियों को देखा। दक्षिण कोरिया के आम लोगों के साथ साथ बुद्धिजीवियों से ये जानने की कोशिश की आखिर उनके दिल और दिमाग में चल रहा है। 

दक्षिण कोरिया की निवासी सैन ने कहा कि उत्तर कोरिया की इस तरह की कार्रवाई से डर लगता है। लेकिन उन्हें भरोसा है कि युद्ध की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की सरकार एक जिम्मेदार सरकार है। हमारी सरकार शांति और विकास में यकीन करती है। लेकिन अगर कोई ऐसे हालात बनते हैं जो दक्षिण कोरिया के हितों के खिलाफ होंगे तो सरकार और आम लोग किसी भी तरह के अप्रिय हालात का सामना करने में सक्षम हैं। 

 

इसके साथ ही हमारे विशेष संवाददाता जय प्रकाश रंजन ने सियोल वूमेन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संतोष गुप्ता से बातचीत की। बातचीत के क्रम में प्रोफेसर संतोष गुप्ता ने बताया कि इसमें शक नहीं है कि किम जोंग उन की कार्रवाइयों से डर का माहौल है। जहां तक युद्ध की बात है उससे न तो इनकार किया जा सकता है, ना ही ये कह सकते हैं युद्ध होगा। किम हर रोज भड़काने वाली न केवल बात करते हैं बल्कि इस तरह के काम कर रहे हैं जिससे सीमित युद्ध हो सकता है। 

उत्तर कोरिया द्वारा हॉसॉन्ग-15 के परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया समेत जापान में दहशत का माहौल है। इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका को सीधेतौर पर खतरा बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है वह न सिर्फ पहले से ज्‍यादा उन्‍नत है बल्कि ज्‍यादा घातक भी है। यह एक इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल आईसीबीएम थी जिसका नाम हॉसॉन्‍ग-15 बताया गया है।

 

इस मिसाइल परिक्षण के बाद दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से करीब 20 मिनट तक बात की और अपनी चिंता भी जताई। इस दौरान उन्‍होंने अमेरिका से उत्तर कोरिया पर फिर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्‍होंने ने यहां तक कहा है कि यदि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर आता है तो सभी का भविष्‍य उज्जवल हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ इस मिसाइल के सफल परीक्षण से उत्साहित किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया को एक न्‍यूक्लियर स्‍टेट घोषित कर दिया है।

ISS से तिगुनी ऊंचाई तक गई हॉसॉन्‍ग 15
यहां पर आपको बता दें कि किम जोंग उन के नेतृत्‍व में उत्तर कोरिया अब तक दर्जनों परमाणु परीक्षण कर चुका है। इस बार उसने इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल हॉसॉन्‍ग 15 का परिक्षण किया है जो जापान के स्‍पेशल इकॉ‍नमिक जोन में जाकर गिरी है। यह मिसाइल परिक्षण इसलिए भी खास है क्‍योंकि यह करीब 4475 किमी की ऊंचाई तक गई जो कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से भी तीगुनी ऊंचाई है। इसके अलावा इसने करीब 950 किमी की दूरी तय करने में करीब 53 मिनट का समय लगाया। इस लिहाज से भी यह उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल है। यह मिसाइल हॉसॉन्‍ग 14 का ही उन्‍नत स्‍वरूप है। इस मिसाइल को लोफ्टेड एंगल से दागा गया था। जानकारों के मुताबिक यदि इसको स्‍टेंडर्ड तरीके से दागा जाता तो यह दस हजार किमी से अधिक ऊंचाई तक चली जाती।

हॉसॉन्ग के परीक्षण पर आप को बताते हैं कि अलग अलग देशों और संस्थाओं की प्रतिक्रिया कैसी है। 

उत्तर कोरिया द्वारा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के बारे में दुनिया के विशेषज्ञों का कहना है कि निश्चित तौर पर तकनीक के लिहाज से ये उम्दा है और खतरे का स्तर बढ़ गया है। आइसीबीएम के परीक्षण के तुरंत बाद उत्तर कोरिया ने हॉसॉन्ग की तस्वीरों को जारी किया। जानकारों का कहना है कि हॉसॉन्ग 15, अपने पूर्ववर्ती हॉसॉन्ग 14 से काफी बड़ा है। हॉसॉन्ग-14 को इसी वर्ष जुलाई में जापान के ऊपर से दो बार दागी गई थी।

 

सीएनएस के माइकल डुट्समैन का कहना है कि इस हॉसॉन्ग मिसाइल उत्तर कोरिया के लिए ही बड़ी मिसाइल नहीं है बल्कि इसके जरिए किन अमेरिका के सभी शहरों को निशाना बनाने में सक्षम हो चुका है। दूसरे शोधकर्ता स्कैमलर का कहना है कि हॉसॉन्ग की दूसरा रूप काफी एडवांस है।

जापान के रक्षा मंत्री नोरी नोडेरा ने कहा कि हॉसॉन्ग आइसीबीएम की उन्नत कृति है। और इसके जरिए बड़े पैमाने पर तबाही मच सकती है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में जब दुनिया के देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, उन हालातों में किसी भी शख्स का सनकभरा फैसला सिर्फ जापान और दक्षिण कोरिया के लिए ही नहीं बल्कि दूसरे मुल्कों को भी परेशानी में डाल देगा।

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Posted By: Lalit Rai