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जासूसी का जाल... विज्ञापनों की आड़ में इजरायली कंपनी रच रही थी खतरनाक साजिश; रिसर्च में खुली इंटरनेट सुरक्षा की पोल

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:43 AM (GMT+05:30)

डिजिटल विज्ञापनों की आड़ में इजरायली कंपनी 'डिस्कवर-टेक' ने यूजर्स को ट्रैक कर उनके डिवाइस में स्पाइवेयर डाले। पेंटागन और यूएन तक इसकी चपेट में आए।

इजरायली कंपनी का खतरनाक खेल।

इजरायली कंपनी का खतरनाक खेल।

HighLights

  1. इजरायली कंपनी डिस्कवर-टेक ने विज्ञापनों से की जासूसी।

  2. लाखों वेबसाइटों, ऐप्स पर जासूसी सॉफ्टवेयर प्लांट किए गए।

  3. पेंटागन, अल-जजीरा जैसे संवेदनशील संगठन भी प्रभावित हुए।

डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। आज के डिजिटल दौर में हम जो विज्ञापन इंटरनेट पर देखते हैं, वे सिर्फ सामान बेचने का जरिया नहीं हैं, बल्कि उसका इस्तेमाल गुप्त जासूसी के लिए भी किया जा रहा है। ऐसा हम नहीं, दो बड़े शोध समूहों सिटिजन लैब और कॉन्फिएंट का कहना है। हाल ही में इन दोनों शोध समूहों ने इसी सिलसिले में एक चौंकाने खुलासा भी किया है। 

दोनों समूहों के अनुसार, इजरायल की डिजिटल विज्ञापन एजेंसी 'डिस्कवर-टेक' ने ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स की जासूसी की है। इस कंपनी ने विज्ञापनों का एक ऐसा जाल बिछाया था जिससे लोगों को ट्रैक किया जा सके और उनके गैजेट्स में खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जा सकें।

इस खुलासे के सामने आने के बाद से एक साथ कई सारे सवाल खड़ हो गए हैं। सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या आज के समय में इंटरनेट पर विज्ञापन देखना भी असरुक्षित है? सवाल यह भी पूछे जा रहे हैं कि आखिर कोई भी कंपनी विज्ञापन से लोगों की जासूसी कैसे कर सकती है? आइए जानते हैं।

कैसे चलता था जासूसी का यह खेल?

शोध समूहों के अनुसार, डिस्कवर-टेक इंटरनेट पर फोन या ईयरबड जैसे आम और रोजाना इस्तेमाल होने वाले उत्पादों के विज्ञापन दिखाती थी। यह कंपनी गूगल, कॉमकास्ट और रूस के यांडेक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन नेटवर्क का इस्तेमाल करती थी।

वेबसाइट्स और ऐप्स तक पहुंच

सिटिजन लैब के अनुसार, इस कंपनी के विज्ञापन दुनिया भर की 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइट्स और 75000 ऐप्स पर चलते थे। जैसे ही कोई यूजर इन विज्ञापनों वाली वेबसाइट या ऐप पर जाता, डिस्कवर-टेक उसे ट्रैक कर लेती थी। कई बार तो सिर्फ विज्ञापन लोड होने भर से ही स्मार्टफोन यूजर्स के फोन नंबर और निजी जानकारियां चुराने की कोशिश की जाती थी।

इतना ही नहीं इस कंपनी की पहुंच इजरायल की कुख्यात स्पाइवेयर कंपनी 'Candiru' जिसे अमेरिकी सरकार ने पहले ही ब्लैकलिस्ट कर रखा है और अन्य सर्विलांस फर्मों तक थी। इन विज्ञापनों के जरिए Candiru का खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर लोगों के डिवाइस में चुपचाप प्लांट कर दिया जाता था।

कितना बड़ा था यह दायरा?

मामले में कॉन्फिएंट के सह-संस्थापक जेरोम डंगू के मुताबिक, डिस्कवर-टेक रोजाना कम से कम 1 करोड़ विज्ञापन दुनिया भर में प्रसारित करती थी। 'कुकी मैचिंग' तकनीक के जरिए यह विज्ञापनों के दायरे से बाहर जाने वाले लोगों को भी ट्रैक करती थी। माना जा रहा है कि इस खेल से सैकड़ों मिलियन (करोड़ों) लोग प्रभावित हुए हैं।

संवेदनशील ठिकाने और संगठन के बारे में जानिए

गौरतलब है कि इन खतरनाक विज्ञापनों ने दुनिया के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील नेटवर्कों को भी अपनी चपेट में लिया। इनमें अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC), संयुक्त राष्ट्र (UN), नाटो (NATO) और यूरोपीय आयोग के साथ-साथ एनवीडिया जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं।

फलस्तीनी क्षेत्रों में व्यापक नजर

शोधकर्ताओं ने बताया कि फलस्तीनी क्षेत्रों में तो इन विज्ञापनों की भरमार थी। वहां की लगभग हर वेबसाइट पर डिस्कवर-टेक का विज्ञापन मिल जाता था, जिससे इस इजरायली फर्म को पूरे देश की डिजिटल गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में मदद मिलती थी।

इतना ही नहीं, सिटिजन लैब ने पुष्टि की है कि डिस्कवर-टेक के विज्ञापनों के जरिए भेजे गए स्पाइवेयर से 2024 से 2025 के बीच कतर के प्रसिद्ध मीडिया संस्थान 'अल-जजीरा' के 45 विंडोज डिवाइसेस को निशाना बनाकर हैक किया गया था।

अब क्या कदम उठाए गए हैं?

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद इस जासूसी नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। 

  • गूगल की कार्रवाई- गूगल ने सिटिजन लैब और कॉन्फिएंट की जांच में सहयोग करते हुए डिस्कवर-टेक को अपनी नीतियों का बार-बार उल्लंघन करने के आरोप में अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
  • इंडस्ट्री बैन- यूरोपीय डिजिटल मार्केटिंग संगठन ने भी ऑडिट के बाद डिस्कवर-टेक को अपने स्वीकृत वेंडर्स की लिस्ट से निलंबित कर दिया है।
  • कॉमकास्ट का एक्शन- कॉमकास्ट की विज्ञापन तकनीक कंपनी 'बीजवैक्स' ने भी अपनी प्लेटफॉर्म से इस फर्म को हटा दिया है।