भारत-जर्मनी पनडुब्बी समझौते को नई दिल्ली की मंजूरी का इंतजार
भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित पनडुब्बी समझौते को जर्मनी ने अंतिम रूप दे दिया है, अब भारत की आंतरिक ...और पढ़ें
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जर्मनी ने पनडुब्बी समझौते को अंतिम रूप दिया, भारत की मंजूरी प्रतीक्षित।
HighLights
जर्मनी ने पनडुब्बी समझौते को अंतिम रूप दिया, भारत की मंजूरी प्रतीक्षित।
8 अरब यूरो का यह सौदा रक्षा सहयोग को मजबूत करेगा।
ड्रोन, मिसाइल तकनीक और व्यापार में भी सहयोग की संभावना।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित पनडुब्बी (सबमरीन) डील को जर्मनी की तरफ से अंतिम रूप दे दिया गया है और जरूरी दस्तावेजों पर सहमति बन गई है। भारत में जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने बुधवार को कहा कि अब इस समझौते के लिए भारत की तरफ से आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार है।
जैस्पर विक ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत के साथ संभावित छह पारंपरिक पनडुब्बियों का सौदा द्विपक्षीय संबंधों को बड़ा बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों, साइबर क्षमताओं, मिसाइल तकनीक और सेंसर के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं हैं।
प्रस्तावित प्रोजेक्ट-75आइ के तहत करीब आठ अरब यूरो के समझौते में जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की मझगांव डाक शिपबिल्डर्स की भागीदारी प्रस्तावित है। जर्मनी ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत के साथ व्यापार, रक्षा और श्रम गतिशीलता के क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने की इच्छा जताई है।
उन्होंने ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), श्रम प्रवासन और रक्षा सहयोग को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि एफटीए पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। जर्मन राजदूत ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से ऊर्जा, अनाज और उर्वरक कीमतों पर असर पड़ा है।
छात्र वीजा से जुड़े लंबित मुद्दों पर वीक ने कहा कि जर्मनी इन चिंताओं को दूर करने के लिए काम कर रहा है। साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के बीच छात्रों और कुशल कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने के महत्व पर भी जोर दिया।
सोर्स- PTI के इनपुट के अनुसार
