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'अल्पसंख्यकों से बर्ताव पर नसीहत देने का पाकिस्तान को हक नहीं', धार्मिक स्वतंत्रता पर भारत ने पाक को लगाई लताड़

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:29 PM (IST)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। भारत ने कारगिल ...और पढ़ें

भारत ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर लताड़ा

भारत ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर लताड़ा

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डिजिटल डेस्क, जेनेवा। अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर भारत को घेरने की पाकिस्तान की कोशिश उलटे उस पर ही भारी पड़ गई, जब भारत ने उसे कारगिल युद्ध की याद दिला दी।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि जिस देश ने 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों के शव तक स्वीकार नहीं किए थे, वह आज आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर उपदेश दे रहा है।

धर्म और आस्था की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक नजीला घानिया की अंतरिम रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अभियानों के दौरान मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के अधिकारों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में शव परिजनों को न सौंपने और दूर-दराज के स्थानों पर गुप्त रूप से दफनाने की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इसका असर असमान रूप से मुस्लिम समुदाय पर पड़ता है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान का यह रुख विडंबनापूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की भूमिका स्वीकारने से इन्कार किया था। इसके बावजूद भारतीय सेना ने मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के शव बरामद किए और कई सैनिकों को सैन्य सम्मान के साथ इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया।

पीओजेके के हालात पर भी उठाए सवाल

मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय गुलाम जम्मू-कश्मीर के हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे भारत को नसीहत देने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इसमें आतंकवादियों के अंतिम संस्कार के अधिकारों पर जोर दिया गया, लेकिन आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों को उतनी प्रमुखता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 के दौरान भेदभाव के मामलों को मुख्य रूप से विकासशील देशों के संदर्भ में पेश करना उचित नहीं है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की चिंता

पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई और सिख समुदायों के सामने मौजूद चुनौतियों का मुद्दा भी चर्चा में है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, धार्मिक अल्पसंख्यकों को ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, जबरन विवाह और धर्मांतरण तथा भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, हैदराबाद में हाल में हुए एक अंतरधार्मिक संवाद में भी हिंदू लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और विवाह तथा सिंध में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए जाने पर चिंता जताई गई।

पूर्व सांसद नीलम कुमारी ने कहा कि कानूनी सुरक्षा के उपायों का सही ढंग से लागू न होना इन समस्याओं से निपटने में बड़ी बाधा है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)