कोलंबो, एजेंसी। भारत ने श्रीलंकाई सेना को डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट देकर एक बड़ा दांव चला है। खास बात यह है कि श्रीलंका में चीन के स्पाई-शिप के पहुंचने से एक दिन पूर्व ही भारतीय नौसेना ने श्रीलंकाई सेना को एक डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट दिया है। भारतीय नौसेना के वाइस चीफ ने ये टोही विमान कोलंबो में श्रीलंका की सेना को राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की मौजूदगी में भेंट किया। कोलंबो में आयोजित सैन्य समारोह में राष्ट्रपति विक्रमसिंघे और भारतीय नौसेना के सह-प्रमुख, वाइस एडमिरल एस एन घोरपडे के अलावा श्रीलंका के चीफ आफ डिफेंस स्टाफ, श्रीलंकाई रक्षा सचिव और श्रीलंका में भारतीय हाई कमिश्नर, गोपाल बागले भी मौजूद थे। गौरतलब है कि हाल में हंबनटोटा पोर्ट पर चीन के एक पोत को लेकर भारत ने श्रीलंका से अपनी आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद चीन का यह पोत हंबनटोटा पोर्ट पर आने से रोक दिया गया था।

बता दें कि 16 अगस्त को चीन का युआन वांग जहाज श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पहुंच रहा है। भारत की आपत्ति के बाद श्रीलंका ने इस पोत को हंबनटोटा जाने की इजाजत नहीं दी है। इस मामले को भारत की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने भारत की बात का मान रखते हुए चीन को साफ इनकार कर दिया है। अब चीन का जहाज श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर नहीं रुकेगा। बता दें कि गुरुवार को हंबनटोटा पहुंचने की योजना थी। चीनी शिप यहां कुछ समय के लिए लंगर डालने वाला था, लेकिन पिछले दिनों भारत ने श्रीलंका में इस पोत की संभावित मौजूदगी को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

भारत को आशंका है कि चीन इस पोर्ट का इस्तेमाल सामरिक गतिविधियों के लिए कर सकता है। भारत को यह चिंता तब से है, जब हंबनटोटा पोर्ट को श्रीलंका ने कर्ज नहीं चुका पाने के बदले 99 साल के लिए गिरवी रख दिया था। बता दें कि 1.5 अरब डालर का हंबनटोटा पोर्ट एशिया और यूरोप के मुख्य शिपिंग मार्ग के पास है। श्रीलंका के लिए चीन सबसे बड़े कर्जदाता देशों में से एक है। चीन ने श्रीलंका में भारत की मौजूदगी कम करने के लिए रोड, रेल और एयरपोर्ट में भारी निवेश किया है। श्रीलंका अभी आर्थिक संकट में फंसा है। वह चीन से चार अरब डालर की मदद चाह रहा है। इस बाबत दोनों देशों के बीच वार्ता भी चल रही है। श्रीलंका चीन को नाराज नहीं करना चाहता है। दूसरी, ओर वह भारत के नजदीक भी रहना चाहता है। भारत ने श्रीलंका को 3.5 अरब डालर की मदद की है। श्रीलंका, चीन और भारत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, चीन के लिए यह काम इतना आसान नहीं है।

Edited By: Ramesh Mishra