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कोलंबिया में गूंजी भारतीय साहित्य की धमक, बोगोटा बुक फेयर में ग्लोबल डायलॉग का नेतृत्व कर रहा भारत

Published: Fri, 24 Apr 2026 05:12 PM (IST)

कोलंबिया के बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले 2026 में भारत 'विशिष्ट अतिथि देश' के रूप में वैश्विक साहित्यिक संवाद का नेतृत्व ...और पढ़ें

कोलंबिया के बोगोटा पुस्तक मेले में भारत 'विशिष्ट अतिथि देश' बना

कोलंबिया के बोगोटा पुस्तक मेले में भारत 'विशिष्ट अतिथि देश' बना

HighLights

  1. भारत बोगोटा पुस्तक मेले 2026 में 'विशिष्ट अतिथि देश' है।

  2. भारतीय पवेलियन में समृद्ध विरासत और आधुनिक उपलब्धियों का प्रदर्शन।

  3. साहित्यिक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और डिजिटल अनुभव आकर्षण का केंद्र।

डिजिटल डेस्क, बोगोटा (कोलंबिया)। कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में आयोजित दुनिया के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेलों में से एक 'बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2026' (FILBo) में भारत इस वर्ष 'विशिष्ट अतिथि देश' (Guest of Honour) के रूप में वैश्विक साहित्यिक संवाद का नेतृत्व कर रहा है। 21 अप्रैल से शुरू हुआ यह मेला 4 मई, 2026 तक चलेगा, जिसमें भारत अपनी समृद्ध विरासत, भाषाई विविधता और आधुनिक उपलब्धियों का भव्य प्रदर्शन कर रहा है।

पवेलियन का उद्घाटन और राजनयिक संवाद

भारत पवेलियन का औपचारिक उद्घाटन 21 अप्रैल को कोलंबिया की संस्कृति मंत्री सुश्री यानाई कदामानी फोनरोडोना और कोलंबिया में भारत के राजदूत वनलालहुमा द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव श्री श्रेयांश मोहन ने कहा कि यह भागीदारी केवल पुस्तकों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक साझा सांस्कृतिक क्षितिज के निर्माण का प्रतीक है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।

कला और वास्तुकला का बेजोड़ संगम

3,000 वर्ग मीटर में फैला 'भारत पवेलियन' भारतीय वास्तुकला का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। पवेलियन का मुख्य मंच राजस्थान के आमेर किले से प्रेरित है, जबकि पुस्तक प्रदर्शनी क्षेत्र केरल की पारंपरिक 'नालुकट्टू' शैली में बनाया गया है। पवेलियन का मास्कोट पश्चिम बंगाल की 'कालीघाट कला' शैली में तैयार किया गया है, जिसमें एक भारतीय परिवार को एक साथ पढ़ते हुए दिखाया गया है। पवेलियन की बाहरी दीवारों पर सजी पतंगें भारत और कोलंबिया के साझा उत्सवों और ऊँची आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

'मौन' और भारतीय प्रदर्शनियां

इस वर्ष मेले की थीम "एक-दूसरे को सुनना ही एक-दूसरे को पढ़ना है" (मौन और शांति) पर आधारित है। इसे ध्यान में रखते हुए पवेलियन में सात विशेष प्रदर्शनियां लगाई गई हैं:

  • युगों-युगों की भारतीय महिला विचारक: थेरीगाथा से लेकर सावित्रीबाई फुले तक के बौद्धिक योगदान का उत्सव।

  • गांधी: लेखकों के लेखक: महात्मा गांधी के एक लेखक और प्रकाशक के रूप में बहुआयामी व्यक्तित्व का चित्रण।

  • साहित्य: आधुनिक भारत की महान आवाजें: टैगोर, प्रेमचंद और मिर्जा गालिब जैसे दिग्गजों का प्रदर्शन।

  • उभरता भारत: अंतरिक्ष विज्ञान (चंद्रयान-3) और आधुनिक बुनियादी ढांचे में भारत की प्रगति।

साहित्यिक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

भारत के 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल अनंत विजय, कुलप्रीत यादव और शांतनु गुप्ता जैसे लेखक विभिन्न सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं। मेले में 100 से अधिक साहित्यिक कार्यक्रम, योग सत्र और आयुर्वेदिक कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। साथ ही, दर्शकों के लिए ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक और राजस्थान के प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। भारतीय कहानियों को स्थानीय पाठकों तक पहुँचाने के लिए 50 से अधिक भारतीय पुस्तकों के स्पेनिश अनुवाद का विमोचन भी किया गया है।

डिजिटल अनुभव और गैस्ट्रोनॉमी

पवेलियन में एआई (AI) कियोस्क और ऑडियो-विज़ुअल बूथ लगाए गए हैं, जहाँ लोग भारतीय शादियों के पहनावे में डिजिटल सेल्फी ले सकते हैं। बच्चों के लिए 'इंडिया क्वेस्ट' क्विज़ और पहेलियाँ आयोजित की जा रही हैं। खान-पान के शौकीनों के लिए लखनऊ (यूनेस्को सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी) की शैली पर आधारित एक विशेष रेस्टोरेंट भी संचालित है, जहाँ भारतीय व्यंजनों का स्वाद परोसा जा रहा है।