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हूतियों ने मिसाइल और घातक रॉकेट बनाने के लिए किया 'Claude AI' का इस्तेमाल, एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में खुलासा

Published: Fri, 11 Sep 2026 12:43 PM (IST)

एंथ्रोपिक ने खुलासा किया है कि यमन में एक समूह उसके 'क्लाउड' AI मॉडल का उपयोग मिसाइलों और गाइडेड रॉकेट के लिए गाइडेंस सॉफ्टवेयर बनाने में कर रहा था।

हूती मिसाइल और रॉकेट बनाने में कर रहा AI का इस्तेमाल (फोटो-रॉयटर्स)

हूती मिसाइल और रॉकेट बनाने में कर रहा AI का इस्तेमाल (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. एंथ्रोपिक ने यमन में AI से हथियार बनाने वाला समूह पहचाना।

  2. हूती मिसाइलों के लिए 'क्लाउड' AI का उपयोग किया जा रहा था।

  3. गाइडेड रॉकेट का परीक्षण विफल रहा, खाते प्रतिबंधित किए गए।

डिजिटल डेस्क, सन्ना। AI कंपनी एंथ्रोपिक ने यमन में मौजूद हथियारों की इंजीनियरिंग करने वाले एक ग्रुप की पहचान की है, जो कि मिसाइलों और गाइडेड रॉकेट के लिए गाइडेंस सॉफ्टवेयर बनाने के लिए उसके 'क्लाउड' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है।

एंथ्रोपिक ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि उसने चीन, रूस और यमन में ऐसे छह ऑपरेशन रोके हैं, जिनमें लोगों ने पारंपरिक हथियार बनाने, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने या हथियारों की खरीद के लिए 'क्लाउड' का इस्तेमाल किया था।

हूती मिसाइल बनाने में कर रहे AI का इस्तेमाल

एंथ्रोपिक ने बताया कि यमन में शामिल ग्रुप हूती कई मिसाइल प्रोग्राम पर काम कर रहा था, जिसमें 2,000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल और R2000 सेट नाम का मिसाइल सिस्टम शामिल था। इस सिस्टम में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का एक वैरिएंट भी था।

एंथ्रोपिक को यह भी पता चला कि इन लोगों ने उड़ने वाले वाहनों के लिए गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सॉफ्टवेयर बनाने के लिए इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह 'क्लाउड कोड' का इस्तेमाल किया।

हालांकि कंपनी को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि ग्रुप ने कोई ऑपरेशनल हथियार सफलतापूर्वक तैयार किया हो, लेकिन उसने कहा कि इन लोगों ने एक गाइडेड रॉकेट का टेस्ट लॉन्च किया था, जो फेल हो गया।

मिसाइल बनाने में कैसे काम कर AI?

एंथ्रोपिक के मुताबिक, यमन के ग्रुप ने एक ओपन-सोर्स ऑटोपायलट को फोन-क्लास फ्लाइट कंप्यूटर के साथ जोड़ने और उड़ने वाले वाहन को कंट्रोल और स्टेबल करने के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर बनाने के लिए 'क्लाउड' का इस्तेमाल किया।

इस काम में कंट्रोल और पोजिशन-एस्टिमेशन सॉफ्टवेयर लिखना, कंट्रोल सेटिंग्स को ट्यून करना, फर्मवेयर बिल्ड चलाना और फ्लाइट सिमुलेशन करना शामिल था। ग्रुप ने एक ही समय में 'क्लाउड' के कई इंस्टेंस का इस्तेमाल किया और हर एक को अलग-अलग काम सौंपे।

एक इंस्टेंस का इस्तेमाल कोडिंग के लिए, दूसरे का रिसर्च के लिए और तीसरे का पहले वाले इंस्टेंस से बने कोड की समीक्षा करने के लिए किया गया।

एंथ्रोपिक ने कहा कि इन लोगों ने बार-बार उसके सुरक्षा उपायों को बायपास करने की कोशिश की, जिससे काम का असली मकसद छिपाया जा सके। इन लोगों ने गतिविधियों को कई सेशन में बांटा और ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया ताकि अलग-अलग इंटरैक्शन से उनके बड़े हथियार प्रोग्राम का पता न चल सके।

कंपनी ने कहा कि उसके सुरक्षा उपायों ने कई रिक्वेस्ट को ब्लॉक किया, लेकिन सभी को नहीं। गाइडेड रॉकेट का टेस्ट फेल होने के कुछ ही घंटों बाद, वे लोग यह पता लगाने के लिए वापस 'क्लाउड' पर आए कि क्या गड़बड़ हुई थी।

एंथ्रोपिक ने कहा कि उसने इस ऑपरेशन से जुड़े अकाउंट्स को बैन कर दिया और पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर्स के साथ जानकारी शेयर की।

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