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हूती हमले और लाल सागर पर कब्जे का असर: तेल का खेल बिगाड़ेगा आपके घर का बजट, कीमतों में उछाल

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:22 PM (IST)

यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के एयरबेस पर हमला किया और लाल सागर के द्वीपों पर कब्जा कर ...और पढ़ें

कच्चे तेल की वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ीं

कच्चे तेल की वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ीं

HighLights

  1. हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया

  2. हमलों से तेल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई, वैश्विक कच्चे तेल के दाम तीन प्रतिशत उछले

  3. लाल सागर में हूती कब्जे से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित

रॉयटर्स, दुबई। अरब देशों की ईरान के साथ सोमवार को ओमान में होने वाली बैठक स्थगित हो गई है। इस बैठक में अमेरिका-ईरान युद्ध और हूती लड़ाकों की आक्रामकता पर बात होनी थी।

इस बीच यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के सीमा के नजदीक स्थित हामिस मुशैत वायुसेना अड्डे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। इस हमले में लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के गोदामों को निशाना बनाया गया है।

हूती के हमले में क्षतिग्रस्त हुई ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन से जल्द आपूर्ति शुरू होने की संभावना नहीं है। इसके चलते अमेरिका और विश्व बाजार के तेल मूल्य में तेज उछाल देखा गया है। इससे अमेरिका और अन्य देशों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।

हूती ने कहा है कि सऊदी एयरबेस पर हुआ हमला उसके क्षेत्र पर सऊदी अरब के सैकड़ों हवाई हमलों का जवाब है। एयरबेस पर हमले के बाद सऊदी अरब के प्रशासन ने यमन की सीमा के नजदीक के अपने तीन शहरों के लिए अलर्ट जारी कर सामान्य गतिविधियों को सीमित कर दिया है।

इस बीच हूती लड़ाकों ने लाल सागर के कुछ अन्य द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है। इसके चलते बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से जहाजों के गुजरने पर आशंकाएं गहरा गई हैं।

वैसे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में शामिल इस रास्ते पर हूती ने केवल सऊदी अरब के जहाजों के आवागमन पर रोक लगा रखी है, बाकी देशों के व्यापारिक जहाजों का आवागमन सामान्य है।

विश्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब पर हो रहे हमलों और उसकी आपूर्ति में बाधा आने के कारण सोमवार को विश्व बाजार में कच्चे तेल का मूल्य तीन प्रतिशत तक उछल गया।

जबकि अमेरिका में सबसे महंगी दर 6.23 डॉलर प्रति गैलन पर तेल बिका। इन स्थितियों में अमेरिका मुश्किल में फंसा हुआ है। वह अपने खास सहयोगी सऊदी अरब की हूती से हमले के मुकाबले में खास मदद नहीं कर पा रहा है।

अमेरिका ने फिलहाल खुफिया सूचनाएं देने पर ही सहमति जताई है। इसी प्रकार से अगस्त में हुए मक्का समझौते के अनुरूप सऊदी अरब की सैन्य मदद करने में पाकिस्तान और तुर्किये भी हिचक रहे हैं। दोनों ही देश बहानेबाजी कर समय निकाल रहे हैं जिससे सऊदी-हूती संघर्ष खुद-ब-खुद खत्म हो जाए।