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जर्मनी के लिए पांचवें बहुउद्देशीय जहाज का निर्माण शुरू, जीआरएसई को मिला 12 जहाजों का आर्डर

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:05 PM (IST)

कोलकाता स्थित जीआरएसई ने जर्मनी के लिए पांचवें बहुउद्देशीय जहाज का निर्माण शुरू किया, जो कुल 12 जहाजों के बड़े निर्यात ऑर्डर का हिस्सा है।

जीआरएसई ने जर्मनी के लिए पांचवें जहाज का निर्माण शुरू किया। (फोटो सोर्स- GRSE)

जीआरएसई ने जर्मनी के लिए पांचवें जहाज का निर्माण शुरू किया। (फोटो सोर्स- GRSE)

HighLights

  1. जीआरएसई ने जर्मनी के लिए पांचवें जहाज का निर्माण शुरू किया।

  2. यह 12 बहुउद्देशीय जहाजों के बड़े निर्यात ऑर्डर का हिस्सा है।

  3. परियोजना 'मेक इन इंडिया' की वैश्विक पहुंच को दर्शाती है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता स्थित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने जर्मनी के लिए पांचवें बहुउद्देशीय जहाज (एमपीवी) का निर्माण शुरू करने की दिशा में गुरुवार को महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया।

जर्मन कंपनी कार्स्टन रेहडर शिफ्समाक्लर एंड रीडरेई के लिए बनाए जा रहे जहाज का कील-लेइंग समारोह आयोजित किया गया। यह परियोजना जीआरएसई के सबसे बड़े वाणिज्यिक जहाज निर्यात आर्डर का हिस्सा है और अंतरराष्ट्रीय जहाज निर्माण बाजार में भारतीय शिपयार्ड की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाती है।

तीन चरणों में मिले 12 जहाजों के आर्डर

जीआरएसई और जर्मन कंपनी के बीच कुल 12 बहुउद्देशीय जहाजों के डिजाइन और निर्माण का समझौता हुआ है। जून 2024 में हुए पहले करार के तहत चार जहाज बनाने हैं। अक्टूबर 2024 में हुए दूसरे करार में चार और जहाज शामिल किए गए।

इनमें पांचवां जहाज इस दूसरे करार के तहत बनने वाला पहला जहाज है। सितंबर 2025 में हुए तीसरे करार के तहत हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली वाले चार जहाज बनाए जाएंगे।

7,500 टन माल ढोने की होगी क्षमता

प्रत्येक जहाज की लंबाई 120 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर और ड्राफ्ट 5.85 मीटर होगा। इनकी मालवहन क्षमता 7,500 डेडवेट टन निर्धारित की गई है। जहाजों में थोक सामग्री, सामान्य माल और बड़ी परियोजनाओं से जुड़े उपकरणों के परिवहन के लिए विशाल कार्गो होल्ड होगा।

इनके डेक पर कंटेनर और पवन टर्बाइन के बड़े ब्लेड भी ले जाए जा सकेंगे। इस परियोजना में जर्मनी की विभिन्न समुद्री कंपनियां सहयोग कर रही हैं। तकनीकी डिजाइन में एसईडीएस सहयोग दे रही है, जबकि डीएनवी जहाजों का वर्गीकरण और प्रमाणन करेगी। रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम जीआरएसई का यह विस्तार ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।