फ्रांस की संसद ने इच्छामृत्यु बिल को दी मंजूरी, ये होंगी कानून की मुख्य शर्तें
फ्रांस की नेशनल असेंबली ने एक ऐतिहासिक फैसले में इच्छामृत्यु बिल को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस बिल के ...और पढ़ें

फ्रांस की संसद ने वर्षों की बहस के बाद इच्छामृत्यु बिल को दी मंजूरी
HighLights
इच्छामृत्यु विधेयक 291-241 के वोट से पास हुआ
यह कानून लोगों को असहनीय पीड़ा से मुक्ति का विकल्प देगा
एपी, पेरिस। फ्रांस की नेशनल असेंबली ने लंबे समय से चल रही बहस के बाद असाध्य और लाइलाज बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सहायता से जीवन समाप्त करने की अनुमति देने वाले असिस्टेड-डाइंग विधेयक को अंतिम मंजूरी दे दी है।
संसद के निचले सदन ने विधेयक के पक्ष में 291 और विरोध में 241 मतों से इसे पारित किया।यह कानून फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा तीन वर्ष पहले घोषित सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नेशनल असेंबली इससे पहले भी तीन बार इस विधेयक का समर्थन कर चुकी थी, जिसके बाद अब संसदीय प्रक्रिया पूरी हो गई है।
दुनिया के कई देशों और अमेरिका के कुछ राज्यों में अलग-अलग कानूनी प्रविधानों के तहत इच्छामृत्यु या चिकित्सकीय सहायता से आत्महत्या की अनुमति दी जाती है।
फ्रांस में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या के कारण जीवन के अंतिम चरण की देखभाल पर बहस लगातार तेज हुई है।
वर्तमान कानून डॉक्टरों को गंभीर रूप से बीमार मरीजों को मृत्यु से पहले बेहोशी की अवस्था में रखने की अनुमति देता है, लेकिन अब तक इच्छामृत्यु या असिस्टेड सुसाइड की अनुमति नहीं थी।
बिल की मुख्य शर्तें
- न्यूनतम 18 वर्ष
- राष्ट्रीयता: फ्रांसीसी नागरिक या कानूनी रूप से रहने वाले
- बीमारी: गंभीर, असाध्य और जीवन-घातक बीमारी जो उन्नत या अंतिम चरण में हो
- पीड़ा: लगातार असहनीय शारीरिक या मनोवैज्ञानिक पीड़ा, जिसका इलाज संभव न हो
- केवल शारीरिक पीड़ा वाले मरीज ही पात्र होंगे। अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों या गंभीर मानसिक विकारों वाले मरीज इसके दायरे में नहीं आएंगे।
- मरीज खुद दवा ले सकेंगे। अगर शारीरिक स्थिति से ऐसा न कर सकें तो डॉक्टर या नर्स मदद करेंगे।
- अनुरोध की समीक्षा 15 दिनों में होगी, उसके बाद 2 दिन का विचार करने का समय मिलेगा।
- फ्रांस की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना पूरे खर्च को कवर करेगी।
समर्थकों का कहना है कि यह कानून लोगों को असहनीय पीड़ा से मुक्ति का विकल्प देगा और सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार सुनिश्चित करेगा। विरोधियों का तर्क है कि इससे बुजुर्गों, विकलांगों और बीमार लोगों पर दबाव बढ़ सकता है।
जनमत सर्वेक्षणों में फ्रांस की अधिकांश जनता ने अंतिम चरण के मरीजों को पेलिएटिव केयर या इच्छा मृत्यु का विकल्प देने का समर्थन किया है।
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नू ने बिल के कुछ हिस्सों को संवैधानिक परिषद के पास भेज दिया है। समीक्षा में एक महीने तक का समय लग सकता है। समीक्षा पूरी होने के बाद ही कानून लागू होगा।
