न्यूट्रिनो क्यों हैं इतने खास? 1988 में आया था विचार, घोस्ट पार्टिकल पर ऐतिहासिक खोज की कहानी
फ्रांसिस हाल्जेन को अंटार्कटिक में 'घोस्ट पार्टिकल' (न्यूट्रिनो) की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्होंने आइस ...और पढ़ें

फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिक में 'घोस्ट पार्टिकल' न्यूट्रिनो की खोज की
HighLights
फ्रांसिस हाल्जेन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिलेगा।
उन्होंने अंटार्कटिक में 'घोस्ट पार्टिकल' न्यूट्रिनो खोजे।
आइस क्यूब आब्ज़र्वेटरी ने ब्रह्मांड के रहस्य खोले।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अंटार्कटिक में ‘घोस्ट पार्टिकल’ खोजने वाले विज्ञानी फ्रांसिस हाल्जेन को इस वर्ष भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। उन्हें यह पुरस्कार अत्यधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो की खोज के लिए अंटार्कटिका में विशाल आइस क्यूब आब्ज़र्वेटरी विकसित करने के लिए दिया गया है।
न्यूट्रिनो मुश्किल से पकड़ में आने वाले ब्रह्मांड के सब-एटामिक पार्टिकल हैं। ये बिना किसी निशान के पृथ्वी और इंसानी शरीर से गुज़र जाते हैं इस कारण इसे ‘घोस्ट पार्टिकल’ कहते हैं। न्यूट्रिनो अंतरिक्ष से आने वाले ऐसे ‘कास्मिक मैसेंजर’ हैं, जो ब्रह्मांड की घटनाओं के रहस्य पहुंचाते हैं।
रायल स्वीडिश एकेडमी आफ साइंसेज ने मंगलवार को घोषणा की कि हाल्जेन को दक्षिणी ध्रुव स्थित आइस क्यूब न्यूट्रिनो आब्ज़र्वेटरी में उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्हें 10 दिसंबर को 1.20 करोड़ स्वीडिश क्राउन (12 लाख डालर) की पुरस्कार राशि मिलेगी।
रायटर के अनुसार स्वीडिश रायल एकेडमी आफ साइंसेज की ईवा ओल्सन ने कहा कि ये कण ब्रह्मांड से संदेश लेकर आते हैं। इनके जरिए दूर-दराज की आकाशगंगाओं और विस्फोट होते तारों में चल रही प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है।
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार पुरस्कार की घोषणा के बाद स्टाकहोम में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने इटली से फोन के जरिए हिस्सा लिया। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय दुनियाभर के विज्ञानियों की सहयोगी टीम को दिया।
उन्होंने कहा, खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि यह प्रयोग सफल हुआ। शुरुआत में अधिकांश वैज्ञानिकों को यह विचार अच्छा तो लगा था, लेकिन बहुत कम लोगों को विश्वास था कि यह वास्तव में काम करेगा—और इनमें मैं खुद भी शामिल था।
हाल्जेन का मानना है कि उनके काम के सबसे महत्वपूर्ण परिणाम अभी सामने आना बाकी हैं। फिलहाल यह बताना जल्दबाजी होगी कि यह विज्ञान ब्रह्मांड के बारे में वास्तव में क्या-क्या उजागर करेगा।
नोबेल पुरस्कारों की स्थापना स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर हुई थी। अल्बर्ट आइंस्टीन, मैरी क्यूरी, पियरे क्यूरी, मैक्स प्लांक और नील्स बोहर जैसे महान विज्ञानियों को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
‘न्यूट्रिनो मैन’ के नाम से मशहूर हैं हाल्जेन
1944 में बेल्जियम के टिएनन में जन्मे हाल्जेन अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ विस्कान्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। 2014 में स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन की स्मिथसोनियन पत्रिका ने हाल्जेन को ‘न्यूट्रिनो मैन’ नाम दिया था।
अंटार्कटिका की बर्फ बनी दुनिया की विशाल ‘टेलीस्कोप’
आइसक्यूब आब्ज़र्वेटरी अंटार्कटिका की लगभग एक घन किलोमीटर बर्फ में स्थापित विशाल पार्टिकल डिटेक्टर है। इसमें पांच हजार से अधिक सेंसर हैं, जो सतह से करीब 2,500 मीटर नीचे तक फैले हैं।
यह आब्ज़र्वेटरी अमुंडसेन-स्कॉट साउथ पोल स्टेशन के पास है। अंटार्कटिका में इसे संचालित रखना बड़ी चुनौती है, क्योंकि दक्षिणी ध्रुव की लंबी सर्दियों के दौरान तापमान -50°सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है।
ऐसे समय में विमानों का उतरना तक मुश्किल हो जाता है। इसलिए कुछ वैज्ञानिक और कर्मचारी वहीं रहकर आब्ज़र्वेटरी की देखभाल करते हैं। साउथ पोल स्टेशन में एक समय में करीब 150 लोग रह सकते हैं। वहां औद्योगिक रसोई, जिम और ग्रीनहाउस जैसी सुविधाएं भी हैं।
न्यूट्रिनो क्यों हैं इतने खास
न्यूट्रिनो चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित नहीं होते। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि वे जिस दिशा से आते हैं, वह दिशा सीधे उनके संभावित स्रोत की ओर संकेत कर सकती है। इसके विपरीत दृश्य प्रकाश—अंतरिक्ष में विभिन्न प्रभावों से प्रभावित हो सकता है। न्यूट्रिनो इसलिए ब्रह्मांड को देखने का अलग और बेहद महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
1988 में आया था विचार, 2011 में पूरा हुआ प्रोजेक्ट
हाल्जेन ने 1988 में पहली बार साउथ पोल की बर्फ में न्यूट्रिनो की खोज करने का विचार रखा था। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में दो दशक से ज्यादा समय लगा और आब्ज़र्वेटरी 2011 में पूरी हुई।
आब्ज़र्वेटरी ने यह स्थापित करने में मदद की है कि उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो केवल हमारी आकाशगंगा के भीतर से ही नहीं, बल्कि आकाशगंगा के बाहर से भी आते हैं। यह जानकारी भी मिली है कि न्यूट्रिनो कैसे बनते हैं, और इनसे ऐसी घटनाओं का भी पता चल सकता है जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी।
