काबुल, एएनआइ। काबुल में महिला प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को तालिबान से महिला मामलों के मंत्रालय को फिर से खोलने, लड़कियों को शिक्षा की अनुमति देने और सरकार के मंत्रिमंडल में महिलाओं को शामिल करने का आग्रह किया। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारी महिलाओं ने देश में महिलाओं की स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस्लामी अमीरात को महिला मंत्रालय को फिर से खोलने, लड़कियों के लिए शिक्षा की सुविधा और वरिष्ठ सरकारी पदों पर महिलाओं की नियुक्ती के लिए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

अफगानिस्तान की संपत्ति जारी करने का आग्रह

एक प्रतिभागी अस्मा ने बताया कहा कि महिला कार्यकर्ताओं और अकादमिक महिलाओं का उपयोग, उप मंत्रियों के रूप में महिलाओं की नियुक्ति, कमजोर परिवारों की सहायता और अफगानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना हमारी मुख्य इच्छाएं हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार महिला प्रदर्शनकारियों ने भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक की संपत्ति को जारी करने का आह्वान किया है। एक महिला अधिकार रक्षक तज़ोर कक्कड़ ने कहा कि हम विश्व मानवतावादी संगठनों से पूछते हैं कि देश छोड़कर जाने और संपत्ति फ्रीज करने की बात कहने वालों लोगों की संख्या एक मिलियन भी नहीं है। हम जानते हैं कि वे ऐसी बातें कह रहे हैं। क्या एक लाख के लिएएक लाख के लिए 34 मिलियन (लोगों) को मारना महत्वपूर्ण है?

महिलाओं और लड़कियों को मिटाने के प्रयास

इस बीच मानवाधिकार के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त के कार्यालय ने हाल के एक बयान में कहा कि तालिबान सार्वजनिक जीवन से महिलाओं और लड़कियों को लगातार मिटाना चाहता है। विशेषज्ञों ने कहा कि आज अफगानिस्तान में सार्वजनिक जीवन से महिलाओं और लड़कियों को लगातार मिटाने के प्रयास सामने आ रहे हैं। इसमें सबसे अधिक खतरे में महिलाओं और लड़कियों की सहायता और सुरक्षा के लिए पहले से स्थापित संस्थान और तंत्र भी शामिल हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि हम अफगानिस्तान में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों से बाहर करने के लगातार और व्यवस्थित प्रयासों के बारे में चिंतित हैं। विशेषज्ञों ने बच्चों और जबरन शादी, यौन शोषण और जबरन श्रम के लिए तस्करी सहित महिलाओं और लड़कियों के शोषण के जोखिम पर भी चिंता जताई है।

महिलाओं के लिए बढ़ रही चुनौतियां

कुछ अफगान महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को अपनी नौकरी पर लौटने से रोकना, सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ एक पुरुष रिश्तेदार की आवश्यकता, महिलाओं को अपने आप सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने से रोकना, और लड़कियों के लिए माध्यमिक और तृतीयक शिक्षा से वंचित करना औरतों के बहिष्करण के लिए लागू की जा रही नीतियां हैं। विशेषज्ञों ने आगे कहा कि इन नीतियों ने महिलाओं के काम करने और जीवन यापन करने की क्षमता को भी प्रभावित किया है, जिसने उन्हें गरीबी में धकेल दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में मानवीय संकट महिलाओं, बच्चों, अल्पसंख्यकों और महिला प्रधान परिवारों के लिए अधिक विनाशकारी रहा है। विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस्लामिक अमीरात को जवाबदेह ठहराने और मानवाधिकारों का पालन करने और महिलाओं और लड़कियों के मौलिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों को तुरंत हटाने का भी आह्वान किया है।

Edited By: Geetika Sharma