पेरिस, एएनआइ। दुनिया भर में आतंकवादियों को आर्थिक मदद रोकने के लिए काम करने वाली संस्था फाइनेंसिएल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अहम बैठक फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को शुरू हुई। इस बैठक में पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अभी निगरानी वाली 'ग्रे' सूची में रखा है। अगर उसकी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिलती है तो उसे काली सूची में भी डाला जा सकता है।

पाकिस्तान की तरफ से जमा कराई जाने वाली रिपोर्ट की जांच एफएटीएफ का इंटरनेशनल को-ऑपरेशन रिव्यू ग्रुप (ICRG) करेगा। एफएटीएफ ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए पाकिस्तान से 27 बिंदुओं पर कार्रवाई करने को कहा था। इस बैठक में यह देखा जाएगा कि क्या पाकिस्तान ने उसकी तरफ से निर्धारित बिंदुओं पर कार्रवाई की है या नहीं और की है तो किस हद तक।

यूएन समेत कई संगठन हैं शामिल

दुनिया भर के 205 देशों समेत विभिन्न संस्थाओं के 800 से ज्यादा प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हो रहे हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ), संयुक्त राष्ट्र (यूएन), विश्व बैंक और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

एफएटीएफ ने 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा था। एफएटीएफ की पिछली बैठक में यह पाया गया था कि पाकिस्तान ने सिर्फ सात बिंदुओं पर ही कुछ कार्रवाई की है। इसके बाद संस्था ने उसे इस साल फरवरी तक का वक्त देते हुए शेष 22 बिंदुओं पर कार्रवाई करने को कहा था।

आतंकियों पर कार्रवाई का दिखावा कर रहा पाकिस्तान

नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान एफएटीएफ की आंखों में धूल झोंकने के लिए आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का दिखावा कर रहा है। पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा आतंकी सरगना हाफिज सईद को आतंकी फंडिंग के दो मामलों में सुनाई गई 11 साल की सजा को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। लेकिन जैश ए मुहम्मद का सरगना मसूद अजहर, मुंबई हमले का मास्टरमाइंड जाकिर रहमान लखवी जैसे खूंखार आतंकियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बैठक में पाकिस्तान की असलियत बताएगा भारत

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर करने के किसी भी कदम का विरोध भारत इस तर्क के साथ करेगा कि वहां अभी तक सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी के खिलाफ कदम उठे हैं। दूसरी तरफ फ्रांस जैसे कुछ दूसरे देश भी हैं जो पाकिस्तान की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों को पर्याप्त नहीं मानते। उनका भी दवाब होगा कि पाकिस्तान को फिलहाल कोई छूट नहीं मिले। ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देशों का रुख भी काफी अहम होगा। इस बात के आसार कम हैं कि चीन, तुर्की की मदद पाकिस्तान के कुछ काम आएगी।

Posted By: Dhyanendra Singh

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