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क्या स्पेस का हो रहा निजीकरण? पृथ्वी की निचली कक्षा में बढ़ती सैटेलाइट की भीड़ ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:00 AM (IST)

पृथ्वी की निचली कक्षा में मानव-निर्मित वस्तुओं और उपग्रहों की बढ़ती संख्या वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

अंतरिक्ष में सैटेलाइट के ट्रैफिक ने बढ़ाई चिंता।

अंतरिक्ष में सैटेलाइट के ट्रैफिक ने बढ़ाई चिंता।

HighLights

  1. पृथ्वी की कक्षा में 31,000 से अधिक वस्तुएं मौजूद।

  2. बढ़ती भीड़ से केसलर सिंड्रोम का खतरा।

  3. स्पेसएक्स स्टारलिंक पर अंतरिक्ष के निजीकरण का आरोप।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पृथ्वी की कक्षा में 31,000 से ज्यादा मानव-निर्मित वस्तुएं मौजूद हैं, जिन पर नजर रखी जा रही है। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है और इसको लेकर कुछ वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है और कहा है कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

जब हम शहर की रोशनी से दूर जाते हैं तो साफ रात में आसमान में तारे चमकते हुए दिखाई देते हैं लेकिन अगर आप थोड़ा ध्यान से देखें तो शायद आपको आसमान में तेजी से गुजरती हुई रोशनी की एक लकीर दिखाई दे। वह चमकता हुआ बिंदु कोई टूटता तारा नहीं, बल्कि एक कृत्रिम उपग्रह (आर्टिफिशियल सैटेलाइट) है।

पृथ्वी की निचली कक्षा में बढ़ती जा रही भीड़

हाल ही की एक वैश्विक अंतरिक्ष पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाश के ये गतिशील बिंदु इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि इससे खगोलविदों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ने लगी है। ईएसए के स्पेस डेब्रीस ऑफिस ने सितंबर 2026 में अपनी वार्षिक अंतरिक्ष पर्यावरण रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बताया गया है कि पृथ्वी की निचली कक्षा में भीड़ बढ़ती जा रही है।

क्या स्पेस का हो रहा निजीकरण?

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब हमारे चारों ओर 31,000 से ज्यादा ऐसी वस्तुएं हैं जिन पर नजर रखी जा रही है। इनमें 18,000 से ज्यादा पेलोड शामिल हैं, जिनमें सक्रिय हार्डवेयर और बेकार हो चुके उपकरण दोनों तरह की चीजें हैं।

इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा लगभग 10,000 अकेले स्पेसएक्स के स्टारलिंक नेटवर्क का है। द संडे टाइम्स की एक अलग रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलेशियन सेंटर फॉर स्पेस गवर्नेंस की सीईओ डॉ. कैसेंड्रा स्टीयर ने कहा कि स्पेसएक्स असल में अंतरिक्ष का निजीकरण कर रहा है।

रिपोर्ट में डॉ. स्टीयर के हवाले से कहा गया, "मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के तहत बाकी सब चीजों की तरह हालात भी कुछ अजीब और बेतुके हो गए हैं। यह एक जिम्मेदार नियामक बिल्कुल नहीं है।"

वैज्ञानिक क्यों हैं चिंतित?

मुख्य समस्या सिर्फ यह नहीं है कि आसमान में भीड़ बढ़ गई है। विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि तब क्या होगा जब हजारों तेज रफ्तार वाली चीजें एक ही संकरे रास्ते से गुजरेंगी। इससे पहले विशेषज्ञों ने केसलर सिंड्रोम नामक स्थिति के बारे में चेतावनी दी है। यह एक ऐसी चेन रिएक्शन है, जिसमें दो उपग्रह गलती से आपस में टकरा जाते हैं और हजारों छोटे-छोटे, तेज रफ्तार वाले टुकड़ों में टूट जाते हैं।

इसके बाद ये उड़ते हुए टुकड़े दूसरे उपग्रहों से टकराते हैं और और भी ज्यादा मलबा पैदा करते हैं। इस तरह पूरा ऑर्बिटल जोन धातु के टुकड़ों के एक ऐसे घेरे में बदल जाता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रा और उपग्रह संचार लगभग असंभव हो जाते हैं।

अंतरिक्ष के कचरे को लेकर चिंता जताते हुए डॉ. स्टीयर ने कहा, "यह एक तरह से हलचल से भरे किसी बेतहाशा बादल जैसा है। ये चीजें सात किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चल रही हैं, जो एक गोली की गति से दस गुना तेज है। इतनी अधिक गति पर कचरे का एक बहुत छोटा सा टुकड़ा भी किसी काम कर रहे उपग्रह को घातक नुकसान पहुंचा सकता है।"

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