नई दिल्‍ली, जेएनएन। भारतीय सीमा पर तनाव को देखते हुए रक्षा वैज्ञानिक और भारतीय सेना ने कमर कस ली है। अब भारतीय सेना को पूरी तरह से आधुनीक किया जा रहा है। खास बात यह है कि सेना के इस आधुनिकीकरण में स्‍वदेशी तकनीकी का ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल पर जोर है। दुश्‍मन की किसी भी रणनीति को विफल करने के लिए भारतीय सेना के तीनों विंगों में एक संतुलन बनाने का प्रयास जारी है। रूसी एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम को इसी कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए। इस क्रम में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का अपग्रेड वर्जन हाइपरसोनिक वेरिएंट ब्रह्मोस-2 का काम एडवांस स्टेज में है। इसमें जिरकान हाइपरसोनिक मिसाइल की तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाए। ऐसे में यह जिज्ञासा होती है कि यह जिरकान हाइपरसोनिक मिसाइल क्‍या है? युद्ध के दौरान यह किस तरह से काम करती है? भारतीय सेना को इसकी जरूरत क्‍यों पड़ी? इसके साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के अपग्रेड वर्जन के बारे में भी जानेंगे? क्‍या है ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल?

1- ध्वनि की रफ्तार से सात गुना तेज रूस की जिरकान मिसाइल। यह मिसाइल दुनिया के किसी भी हिस्‍से पर हमला कर सकती है और अमेरिका के बनाए डिफेंस सिस्‍टम को भी चकमा दे सकती है। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक क्रूज मिसाइल ध्‍वनि की सात गुना रफ्तार या मैक 7 की गति से हमला करने में सक्षम है। इस हाइपरसोनिक मिसाइल को ट्रैक करना और उसे इंटरसेप्‍ट करना बहुत मुश्किल है। इसी तर्ज पर ब्रह्मोस-2 मिसाइल को भी विकसित किया जा रहा है। भारत के इस मिसाइल की जद में चीन के कई शहर आ जाएंगे।

2- भारत और रूस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के नए वेरिएंट को बनाने पर तेजी से काम कर रहे हैं। यह भारत और रूस की संयुक्‍त परियोजना है। ब्रह्मोस-2 नाम की यह मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड से चलने में सक्षम होगी। इसमें रूस की सबसे घातक जिरकान मिसाइल की टेक्नोलाजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। जिरकान दुनिया में सबसे तेज गति से चलने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है। इसकी स्पीड 6100 किलोमीटर से लेकर 11000 किलोमीटर तक है। मौजूदा समय में ब्रह्मोस दुनिया की एकमात्र ऐसी मिसाइल है जिसे जमीन, हवा, पानी और पनडुब्बी से लांच किया जा सकता है। इस मिसाइल को भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट्स की रेंज 300 से 700 किलोमीटर के बीच है।

3- रूस का दावा है कि जिरकान हाइपरसोनिक मिसाइल की स्‍पीड इतनी अधिक है कि यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकती है। यूक्रेन युद्ध में जिरकान हाइपरसोनिक मिसाइल का भी उपयोग किया गया है। यह दावा किया जा रहा है कि यह मिसाइल सिर्फ पांच मिनट में लंदन को निशाना बना सकती है। यूक्रेन के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइल किंझल का भी जमकर इस्‍तेमाल करके पश्चिम देशों की ओर से दिए गए हथ‍ियारों के गोदाम को तबाह कर दिया गया। जिरकान मिसाइल इस साल रूसी सेना में शामिल हुई है। रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादीमिर पुतिन ने कहा था कि इसके सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रूसी जिरकान हाइपरसोनिक मिसाइल की शक्तियां अब सभी के सामने हैं।

4- यह दावा किया जा रहा है कि इस मिसाइल का लांच इतना तेज होता है कि लक्ष्‍य को हिट करने के बाद ही इसका पता चलता है। रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन ने दिसंबर, 2021 में कहा था कि जिरकान हमारी सबसे नई मिसाइल है, जो समुद्र से समुद्र और जमीन पर हमला करने में सक्षम है। इसका परीक्षण बिना किसी बाधा के सफल रहा। यह दावा किया गया है कि यह मिसाइल 1000 किमी दूर स्थित टारगेट को ध्वस्त कर सकती है। जिरकान एक एंटी शिप क्रूज मिसाइल है जिसका पिछले साल परमाणु सबमरीन से परीक्षण किया गया था।

Edited By: Ramesh Mishra

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