नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। जर्मनी में अपनी तरह का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक पालतू कुत्ते ने अपने मालिक के हाथ को चाट लिया जिससे उसको गंभीर इंफेक्शन हो गया, ये इंफेक्शन इतना खतरनाक था कि इसकी चपेट में आने के 16 दिन बाद उसकी मौत हो गई। जबकि इससे पहले 63 साल का यह व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ था। अपने पालतू कुत्ते के काटने के बाद उसको निमोनिया, गैंग्रीन और तेज बुखार (106°F) के साथ कई अन्य बीमारियों की शिकायत हुई, इन बीमारियों से वो निपट नहीं पाए जिससे उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि वो व्यक्ति सी. कैनिमोरस (Capnocytophaga canimorsus)नामक बैक्टीरिया से पीड़ित था। कैपनोसाइटोफेगा कैनिमोरस एक तरह का बैक्टीरिया है जो जानवरों के काटने से ही मनुष्य के शरीर में फैलता है।

शुरूआत में दिखने लगे लक्षण 

जब ये व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा तो उसे तीन दिनों तक फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दिए, उसे बुखार था और सांस लेने में तकलीफ थी। ये मामला जर्मनी के ब्रेमेन में रोते क्रुज़ क्रुकेनहॉस के डॉक्टरों द्वारा एक चिकित्सा पत्रिका में बताया गया था। जब तक उन्होंने चिकित्सा शुरू की, तब तक आदमी पहले से ही गंभीर सेप्सिस था। डॉक्टरों ने कहा और अपने जीवन को बचाने और बचाने के लिए गहन देखभाल की आवश्यकता थी। पहले चार दिनों में जब वे अस्पताल में थे, उनकी हालत काफी खराब हो गई थी, जो उनके चेहरे पर दाने और नसों में दर्द के साथ शुरू हुई थी और उनके पैरों में चोट के निशान थे। इसके बाद उनकी किडनी और लिवर बंद हो गए और उनकी रक्त वाहिकाओं में रक्त का थक्का जमने लगा, जिससे उनकी त्वचा सड़ने लगी और कार्डियक अरेस्ट हो गया। 

डॉक्टरों ने जीवन बचाने के लिए उठाया कदम 

उनके दिल की धड़कन रुकने के बाद जीवन को बचाने के लिए डॉक्टरों ने प्रयास किए। इसके लिए उनको काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने कहा कि सी.कैनिमोरस नामक संक्रमण सबसे अधिक बार काटने से होता है। डॉक्टरों को इस बात का आर्श्चय था कि ये केवल चाटने से कैसे हो गया। चाटने से कम संख्या में बैक्टीरिया प्रसारित होता है। नीदरलैंड में हुए एक अध्ययन के अनुसार इस तरह की बीमारी प्रत्येक 1.5 मिलियन लोगों में से केवल एक व्यक्ति को ही हो सकती है।

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले होते हैं प्रभावित 

डॉक्टरों ने कहा कि ये बीमारी आमतौर पर उन लोगों में देखने को मिलती है जिनके अंदर रोगों से लड़ने की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। मगर जिस तरह से इस व्यक्ति को ये बीमारी हुई है उससे पता चला कि ये किसी को भी हो सकता है। यदि ये भी कहा जाए कि उस व्यक्ति के शरीर में कोई खुला घाव हो जहां पर उस कुत्ते ने चाट लिया हो जिससे उसके शरीर में ये संक्रमण हुआ हो वैसा भी देखने को नहीं मिला। डॉ.नाओमी मैडर की अगुवाई वाली टीम ने कहा कि 'फ्लू जैसे लक्षणों वाले पालतू मालिकों को तत्काल चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए, जब उनके लक्षण एक साधारण वायरल संक्रमण से अधिक हों, जो इस मामले में [सांस लेने में समस्या और दाने] सामने थे।

16 दिन बाद हो गई मौत  

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के रोगियों को कुत्तों और बिल्लियों के संपर्क में रहने के लिए सलाह लेनी चाहिए। उस आदमी की कार्डियक अरेस्ट के बाद उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन वो तेजी से बिगड़ता जा रहा था। इस वजह से उसके शरीर में फेफड़ों में एक फंगल संक्रमण विकसित हो गया था, जिससे उसे निमोनिया हो गया। उसके पूरे शरीर और उसकी उंगलियों और पैर की उंगलियों में गैंग्रीन हो गया था। उनके मस्तिष्क के स्कैन से पता चला कि उनके मस्तिष्क में द्रव का भारी निर्माण हुआ था, जो अंग को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा था। इस वजह से और कई अंगों के फेल हो गए, अस्पताल में भर्ती होने के 16 दिन बाद उस आदमी की मौत हो गई। इस तरह का एक केस रिपोर्ट यूरोपियन जर्नल ऑफ केस रिपोर्ट्स इन इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित हुई थी। दे डेलीमेल नामक साइट में इस तरह की खबर को विस्तार से कवर किया गया है।

DOGS 'SALIVA में मुख्य बैक्ट्रिया क्या है? 

कैपोनोसाइटोफेगा कैनीमोरस, एक जीवाणु रोगजनक आमतौर पर बिल्लियों और कुत्तों की लार में पाया जाता है। यह स्वस्थ व्यक्तियों में बीमारी पैदा करने की दुर्लभ क्षमता है लेकिन पहले से मौजूद स्थितियों या समझौता प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में गंभीर बीमारी का कारण माना जाता है। बैक्टीरिया का संचरण जानवरों के काटने, चाटने या यहां तक कि निकटता के माध्यम से हो सकता है। आमतौर पर लक्षण एक से आठ दिनों के भीतर दिखाई देते हैं लेकिन ज्यादातर दूसरे दिन।

वे फ्लू जैसे लक्षणों से लेकर सेप्सिस तक हो सकते हैं। संक्रमण आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है और कम से कम तीन सप्ताह के लिए सिफारिश की जाती है। लेकिन दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिनमें गैंग्रीन, दिल का दौरा और गुर्दे की विफलता से विच्छेदन शामिल हैं। जितनी तेजी से संक्रमण का पता चलता है, जीवित रहने की संभावना उतनी ही बेहतर होती है। संक्रमित लोगों में से लगभग 30 प्रतिशत मर जाते हैं।

स्रोत: सीडीसी 

Posted By: Vinay Tiwari

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