ब्रसेल्स, न्यूयार्क।   रूस के 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद नाटो के अस्तित्व पर सवाल खड़े होने लगे। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो का मजाक उड़ाया, तो फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रां ने कहा कि गठबंधन की ब्रेन डेथ हो चुकी है। लेकिन अब यूक्रेन से लगी सीमा पर रूस की सेना के जमावड़े और इस मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की धमकियों ने नाटो को एकजुट करने का काम किया है।

रूस के खिलाफ एकजुट हुआ रूस 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में रूस के खिलाफ नाटो देशों के सदस्य एकजुट होकर सामने आए। स्वीडन की सुरक्षा व विकास संस्थान की अध्यक्ष एना वीजलैंडर ने कहा, रूस को रोकना नाटो के डीएनए में है। ऐसा इसलिए क्योंकि रूस ही ऐसा देश है जो यूरोपीय देशों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकता है। रूस नाटो के लोकतांत्रिक सामंजस्य को कमजोर करने के कोशिश कर रहा है। रूस हमारे चुनावों, सोशल मीडिया, संसदों व नागरिकों को निशाना बना रहा है। ऐसे में जरूरी है कि नाटो के सदस्य पूरी ताकत के साथ रूस के खिलाफ खड़े हो जाएं।

यूक्रेन के विशेष बलों को प्रशिक्षण दे रहा अमेरिका : रिपोर्ट

अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी सीआइए यूक्रेन के विशेष बलों के साथ एक गुप्त कार्यक्रम से जुड़े पांच पूर्व खुफिया अधिकारियों ने इसका खुलासा किया है। दावा किया गया है कि अमेरिका के दक्षिण में यह कार्यक्रम 2015 से चल रहा है। इसे ओबामा प्रशासन ने हरी झंडी दी थी और ट्रंप प्रशासन में इसे और विस्तार मिला। अब बाइडन प्रशासन में भी इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। 

पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा था  कि रूस ने यूक्रेन के साथ अपनी सीमा के पास लगभग 100,000 सैनिकों को बहुत कम आदेश पर उस संख्या को दोगुना करने की योजना के साथ तैनात किया था। रूस गलत सूचना फैला रहा था कि यूक्रेन संघर्ष को भड़काने की कोशिश कर रहा है।

Edited By: Monika Minal